गोरझामर में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का मामला गरमाया

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स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बिना डिग्री इलाज करने और भारी डोज के इंजेक्शन व दवाएं देने के आरोप;

कलेक्टर से जांच और सख्त कार्रवाई की
मांग

गोरझामर/देवरी। सागर जिले की देवरी तहसील के गोरझामर क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा अस्पताल संचालित कर मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां कुछ लोग बिना मान्य चिकित्सकीय डिग्री के विभिन्न बीमारियों का इलाज करने का दावा कर रहे हैं। मामले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और अवैध रूप से संचालित चिकित्सा केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोरझामर में बंगाली चिकित्सक के नाम से चर्चित डॉ. टीके विश्वास और डॉ. मजूमदार पर सभी प्रकार के रोगों का इलाज करने का दावा करने तथा मरीजों को भारी डोज के इंजेक्शन, ड्रिप और टैबलेट देने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित चिकित्सा केंद्रों के दस्तावेजों की जांच होना अभी बाकी है।

पत्रकारों के सवाल पर डिग्री को लेकर उठे सवाल

बताया गया कि जब पत्रकारों ने संबंधित व्यक्तियों से उनकी चिकित्सकीय डिग्री और योग्यता के बारे में सवाल किए, तो कथित तौर पर उन्होंने डिग्री नहीं होने की बात कही। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि वे देवरी बीएमओ की अनुमति से अस्पताल चला रहे हैं और लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों ने अधिकारियों से अच्छे संबंध होने तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उनके कामकाज की जानकारी होने की बात भी कही। उन्होंने पत्रकारों को सीधे बीएमओ से बात करने की सलाह दी।
यदि बातचीत के दौरान किए गए ये दावे सही हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित चिकित्सा केंद्रों के पास संचालन की अनुमति है या नहीं, वहां इलाज करने वाले व्यक्तियों की शैक्षणिक योग्यता क्या है और मरीजों को दी जा रही दवाओं एवं इंजेक्शनों का उपयोग निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं।

बीएमओ से लेकर सीएमएचओ तक जांच की मांग

इस मामले में देवरी ब्लॉक के स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग की जा रही है कि संबंधित चिकित्सा केंद्रों का रिकॉर्ड खंगाला जाए और यह जांच की जाए कि पूर्व में किसी अधिकारी ने निरीक्षण किया था या नहीं। यदि निरीक्षण हुआ था, तो उसकी रिपोर्ट और उसके बाद की गई कार्रवाई का भी खुलासा होना चाहिए।
हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों की मिलीभगत या किसी प्रकार की सांठगांठ के आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर सागर कलेक्टर से संज्ञान लेने और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई की निगरानी कराने की मांग की जा रही है। मांग है कि देवरी बीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), सागर के स्तर पर संबंधित चिकित्सा केंद्रों की जांच कराई जाए।
जांच के दौरान चिकित्सकीय डिग्री, पंजीयन, अस्पताल संचालन की अनुमति, दवाओं के भंडारण और मरीजों को दिए जा रहे उपचार की पड़ताल की जानी चाहिए। यदि बिना आवश्यक योग्यता या वैधानिक अनुमति के इलाज किए जाने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर ऐसे केंद्रों का संचालन बंद कराया जाए।

पहले भी दिए जा चुके हैं सख्त कार्रवाई के निर्देश

बताया जाता है कि सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल द्वारा पूर्व में स्वास्थ्य विभाग की बैठक में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने और अवैध रूप से संचालित अस्पतालों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में गोरझामर में सामने आए आरोपों की गंभीरता से जांच कराना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर किस हद तक हो रहा है।
अब सवाल यह है कि गोरझामर में संचालित बताए जा रहे इन चिकित्सा केंद्रों की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या संबंधित व्यक्तियों के पास मरीजों का इलाज करने की वैधानिक योग्यता और अनुमति है? और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय होगी?
स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई से ही इन सवालों का जवाब सामने आ सकेगा। मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी व्यक्ति को बिना आवश्यक योग्यता के इलाज करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

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