सागर जिले में इफको की सचल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला शुरू, किसानों को खेतों में मिलेगी मिट्टी जांच की सुविधा

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कलेक्टर प्रतिभा पाल ने हरी झंडी दिखाकर वाहन को किया रवाना, एक सप्ताह तक विभिन्न विकासखंडों में होगा भ्रमण

सागर, 22 अक्टूबर 2026।

सागर जिले में किसानों को खेतों की मिट्टी की जांच की सुविधा उपलब्ध कराने और मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इफको की सचल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का शुभारंभ किया गया। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने हरी झंडी दिखाकर सचल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला वाहन को रवाना किया।

इस अवसर पर अपर कलेक्टर अविनाश रावत, उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग राजेश त्रिपाठी, जिला विपणन संघ के मंडल प्रबंधक रोहित बघेल, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीरज दुरेजा, सहायक संचालक कृषि अनिल राय एवं जयदत्त शर्मा, तकनीकी सहायक कृषि भूपेंद्र राजपूत तथा इफको के क्षेत्रीय अधिकारी प्रतीक गुप्ता उपस्थित रहे।

एक सप्ताह तक विभिन्न विकासखंडों में पहुंचेगा वाहन

इफको के क्षेत्रीय अधिकारी प्रतीक गुप्ता ने बताया कि सचल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला आगामी एक सप्ताह तक जिले के विभिन्न विकासखंडों में भ्रमण करेगी। इस दौरान किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर उनका परीक्षण किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनके क्षेत्र में ही मृदा परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराना और मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति के आधार पर उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करना है।

उर्वरकों पर होने वाला अनावश्यक खर्च होगा कम

मृदा परीक्षण से किसानों को मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी मिलेगी। इसके आधार पर फसलों के लिए आवश्यक उर्वरकों का संतुलित और निर्धारित मात्रा में उपयोग किया जा सकेगा। इससे अनावश्यक उर्वरक खर्च कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसलों की उत्पादकता में सुधार करने में मदद मिलेगी।

किसानों से मिट्टी की जांच कराने की अपील

कलेक्टर प्रतिभा पाल और उपसंचालक कृषि राजेश त्रिपाठी ने किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण अवश्य कराएं। परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें, ताकि मृदा स्वास्थ्य सुरक्षित रखने के साथ कृषि लागत को भी कम किया जा सके।

सचल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की यह पहल वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को खेती में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और टिकाऊ कृषि विकास को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

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