गौरझामर और अनंतपुरा में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का मामला गरमाया, कार्रवाई के इंतजार में मरीजों की सुरक्षा!

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स्वास्थ्य मंत्री से लेकर कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल, तीनों कथित क्लीनिकों को सील करने की मांग
देवरी/गौरझामर। सागर जिले की देवरी तहसील के गौरझामर और अनंतपुरा क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा इलाज किए जाने का मामला लगातार चर्चा में है। गौरझामर में डॉ. टीके विश्वास एवं डॉ. अश्वनी मजूमदार और अनंतपुरा ग्राम में डॉ. ललित राजोरिया के यहां बड़ी संख्या में मरीजों के इलाज किए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि इन डॉक्टरों द्वारा विभिन्न बीमारियों का इलाज करने का दावा किया जाता है और मरीजों को इंजेक्शन एवं बोतल चढ़ाकर उपचार दिया जाता है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग से जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।
लगातार शिकायतें, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, कथित झोलाछाप डॉक्टरों के यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में गरीब मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। आरोप यह भी हैं कि मरीजों से उपचार के नाम पर हजारों रुपये तक वसूले जाते हैं तथा हैवी डोज के इंजेक्शन और बोतल चढ़ाई जाती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित चिकित्सकों की योग्यता एवं पंजीयन की आधिकारिक जांच होना आवश्यक है।
इस पूरे मामले को लेकर अखबारों में लगातार समाचार प्रकाशित होने और स्वास्थ्य मंत्री, सागर कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), एसडीएम तथा देवरी बीएमओ को जानकारी दिए जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद संबंधित अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीएमओ का प्रभार बदलने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले में देवरी बीएमओ डॉ. पूजा परमार को पद से हटाए जाने और महाराजपुर शासकीय अस्पताल के डॉ. अमित रंजन त्रिपाठी को बीएमओ का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। बताया गया था कि गौरझामर के दोनों कथित झोलाछाप डॉक्टरों और अनंतपुरा के संबंधित चिकित्सक के अस्पतालों की जांच कर उन्हें सील करने तथा नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित स्थानों पर अब भी इलाज जारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कार्रवाई की तैयारी की गई थी, तो अब तक उसका ठोस परिणाम सामने क्यों नहीं आया?
सीएमएचओ के आदेश के पालन पर भी सवाल
इस मामले में एक और गंभीर सवाल बीएमओ के प्रभार को लेकर उठ रहा है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि डॉ. अमित रंजन त्रिपाठी को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के आदेश के बावजूद उन्हें अब तक विधिवत प्रभार नहीं मिला है, जबकि डॉ. पूजा परमार को भी उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजे जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
हालांकि, इन प्रशासनिक दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि बीएमओ के प्रभार संबंधी आदेश पर अमल की वर्तमान स्थिति क्या है और यदि आदेश जारी हो चुका है, तो उसके क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है।
क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण मिल रहा है?
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कथित झोलाछाप डॉक्टरों को किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि, किसी नेता या अधिकारी की मिलीभगत अथवा निजी स्वार्थ के संबंध में फिलहाल कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं है। ऐसे में इस पहलू की जांच तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ही की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचने की बात कही जा रही है, तो मामले की जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? यदि संबंधित लोग बिना आवश्यक योग्यता या पंजीयन के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप सही नहीं हैं, तो विभाग को जांच के निष्कर्ष भी स्पष्ट करने चाहिए।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि, प्रशासन से जवाबदेही की मांग
गौरझामर और अनंतपुरा के इस मामले में अब स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की जा रही है कि तीनों स्थानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, चिकित्सकों की योग्यता एवं पंजीयन की पुष्टि की जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही बीएमओ के प्रभार संबंधी आदेश की स्थिति स्पष्ट कर जांच एवं कार्रवाई की समय-सीमा सार्वजनिक की जाए।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस मामले में ठोस कदम उठाता है या शिकायतों और आरोपों के बीच कार्रवाई का इंतजार आगे भी जारी रहता है।

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