सागर: डॉ. हरीसिंह गौर विश्‍वविद्यालय के दर्शनशास्‍त्र विभाग में रवीन्‍द्रनाथ टैगोर की 165 वीं जन्‍मजयंती


सागर: डॉ. हरीसिंह गौर विश्‍वविद्यालय के दर्शनशास्‍त्र विभाग में रवीन्‍द्रनाथ टैगोर की 165 वीं जन्‍मजयंती

07 मई, 2026 को मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान अध्‍ययनशाल के अधिष्‍ठाता प्रो. नागेश दुबे रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्‍यक्षता दर्शनशास्‍त्र विभागाध्‍यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्‍जवलन तथा माँ सरस्‍वती, रवीन्‍द्रनाथ टैगोर एवं डॉ. हरीसिंह गौर के चित्रों पर माल्‍यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत रवीन्‍द्र संगीत से हुई जिसे बी.फार्मा के विद्यार्थी अनुभव पॉल ने प्रस्‍तुत किया। इसके पश्‍चात दर्शन-विभाग के विद्यार्थी अथर्व मिश्रा व सौम्‍या शार्मा ने रवीन्‍द्रनाथ टैगोर की कुछ कविताओं का पाठ किया। विभाग के शोधार्थी अक्षरा सिंघई व गौरव कुमार ने टैगोर की कविताओं व उनके दर्शन पर चर्चा की।
कार्यक्रम में भौतिक विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. महेश्‍वर पाण्‍डा ने रवीन्‍द्रनाथ टैगोर के मूल्‍यों पर चलने की बात पर बल दिया। तत्‍पश्‍चात दर्शन-विभाग की सहायक आचार्या डॉ. अर्चना वर्मा ने कहा कि टैगोर मानवीय गरिमा व मानव जाति की आध्‍यात्मिक एकता के समर्थक थे। डॉ. नरेन्‍द्र कुमार बौद्ध ने कहा कि टैगोर के अनुसार प्रत्‍येक व्‍यक्ति विशिष्‍ट एवं गरिमामय है। दर्शन-विभाग के ही शिक्षक डॉ. सत्‍यनारायण देवलिया ने टैगोर के दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव का धर्म उसके अनिवार्य आन्‍तरिक स्‍वरूप की अभिव्‍यक्ति है जो उसे ससीम से असीम की ओर ले जाती है। रसायन विभाग के डॉ. विवेक तिवारी ने दर्शन विभाग की समृद्ध परम्‍परा का स्‍मरण किया। जीव विज्ञान स्‍नातक के विद्यार्थी अंकित शाह ने टैगोर की रचना पर गायन प्रस्‍तुत किया।
मुख्‍य अतिथि प्रो. नागेश दुबे ने रवीन्‍द्रनाथ टैगोर व डॉ. हरीसिंह गौर के व्‍यक्तित्‍वों में समानता बताते हुए कहा कि दोनों ही प्रकृति प्रेमी थे तथा दोनों ने ही शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किये। दर्शन-विभाग के विभागाध्‍यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने अपने अध्‍यक्षीय उद्बोधन में मनुष्‍य और ब्रह्माण्‍ड के स्‍वरूप में तादात्‍म्‍य पर बल दिया। डॉ. तिवारी ने सभी का आभार ज्ञापन भी किया। दर्शन विभाग की आचार्या डॉ. देवस्मिता चक्रबर्ती ने कार्यक्रम का संचालन किया। इसका समापन राष्‍ट्रगान से हुआ।

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