
कॉलेज प्रवेश में सागर जिला प्रदेश में अव्वल: पं. दीनदयाल उपाध्याय अग्रणी कॉलेज में युवाओं का जबरदस्त रुझान
प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता की सतत मॉनिटरिंग में दाखिलों का महाअभियान जारी; पहले ही राउंड में 781 छात्रों ने पक्की की सीटें
सागर/ उच्च शिक्षा विभाग के शैक्षणिक सत्र 2026–27 के कॉलेज दाखिलों में सागर जिले ने सर्वाधिक छात्र पंजीयन कराकर पूरे प्रदेश में बाजी मारी है। जिले की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच प्रवेश प्रक्रिया को सुचारू, पारदर्शी व सुव्यवस्थित बनाने के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता खुद कमान संभाले हुए हैं। प्राचार्य डॉ. गुप्ता के मार्गदर्शन में प्रवेश प्रक्रिया की जिला प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी एवं महाविद्यालय के प्रवेश प्रभारी डॉ. विनय शर्मा द्वारा पूरी मुस्तैदी के साथ जिले और कॉलेज स्तर पर प्रवेश के इस महाअभियान का कुशल संचालन व प्रबंधन किया जा रहा है। प्राचार्य व प्रभारियों की इस टीम द्वारा जिले के सभी शासकीय व अशासकीय महाविद्यालयों की लगातार सघन मॉनिटरिंग व समीक्षा की जा रही है, जिससे छात्र-छात्राओं को बिना किसी बाधा के सुगमता से प्रवेश मिल रहा है। इसी कड़ी में प्रथम चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग पूरी होने के बाद स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) को मिलाकर कुल 781 छात्र-छात्राओं ने फीस जमा कर अपनी सीटें सुरक्षित कर ली हैं।
प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने प्रदेश में सर्वाधिक संख्या में सागर जिले में पंजीयन होने का मुख्य श्रेय ‘कॉलेज चलो अभियान’ में लगी प्राध्यापकों व कर्मचारियों की टीमों को दिया है, जिनके सतत संपर्कों, ग्रामीण अंचलों में किए गए अथक प्रयासों और जागरूकता अभियानों से सागर जिला आज पूरे प्रदेश में सिरमौर बनकर उभरा है।
पारंपरिक कोर्सेज के साथ BBA, औद्योगिक रसायन और बायोटेक मुख्य आकर्षण
महाविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ कला, विज्ञान और वाणिज्य के पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ समय की मांग के अनुरूप बीबीए (BBA), औद्योगिक रसायन और बायोटेक्नोलॉजी जैसे रोजगारोन्मुखी व्यावसायिक विषय भी सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। यही कारण है कि यह कॉलेज संभाग भर के युवाओं की पहली पसंद बना हुआ है।
प्रथम राउंड में स्नातक स्तर पर कुल 601 छात्र-छात्राओं ने फीस जमा की है, जिसमें सर्वाधिक रुझान कला संकाय के अंतर्गत बीए में 337 और विज्ञान संकाय के अंतर्गत बीएससी में 148 छात्र संख्या के रूप में रहा, जबकि बीकॉम में 116 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। स्नातक की शेष 2899 सीटों पर अब द्वितीय चरण और सीएलसी (CLC) में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। इसी तरह, स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर पर भी 180 विद्यार्थियों ने प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी की हैं, जिनमें एमए में 82 और एमएससी में 79 छात्रों ने फीस जमा की है। पीजी में अब 1140 सीटें शेष हैं।
विषय बदलने वाले विद्यार्थियों को दिया जा रहा ‘पात्रता प्रमाण पत्र’
प्रवेश प्रक्रिया के दौरान उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार एक विशेष और छात्र-उपयोगी व्यवस्था भी की गई है। हायर सेकेंडरी अथवा ग्रेजुएशन के बाद अपने मूल विषय को बदलने के इच्छुक विद्यार्थियों का प्राध्यापकों द्वारा मौखिक साक्षात्कार लिया जा रहा है। विषय परिवर्तन के लिए पात्र पाए जाने पर ऐसे विद्यार्थियों को मौके पर ही ‘पात्रता प्रमाण पत्र’ भी जारी किए जा रहे हैं। यह प्रमाण पत्र प्रदेश के किसी भी महाविद्यालय में संबंधित नए विषय में प्रवेश लेने के लिए पूरी तरह अधिकृत रहेगा।
प्रवेशार्थियों के मार्गदर्शन के लिए परिसर में मुस्तैद है ‘हेल्प डेस्क’
प्रवेश प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ. संदीप सबलोक ने बताया कि दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को विषय चयन तथा अन्य कठिनाइयों के त्वरित निराकरण व सहयोग के लिए महाविद्यालय परिसर में ही एक विशेष हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। प्रवेश प्रभारी डॉ. विनय शर्मा के कुशल निर्देशन में यह टीम निरंतर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रही है। हेल्प डेस्क प्रभारी डॉ. देवेंद्र सिंह के साथ डॉ. सुनील साहू, डॉ. अंकुर गौतम, डॉ. संदीप तिवारी, सीपी सिंह एवं डॉ. अखिलेश तिवारी सहित वरिष्ठ प्राध्यापकों की बड़ी टीम प्रतिदिन मुस्तैदी से छात्र हित में कार्य कर रही है।
सतत समीक्षा से प्रक्रिया हुई आसान: डॉ. सरोज गुप्ता (प्राचार्य)
“सागर जिले का प्रदेश में नंबर वन आना पूरे संभाग के लिए गौरव की बात है। इसका पूरा श्रेय हमारी ‘कॉलेज चलो अभियान’ की समर्पित टीमों को जाता है। हमारे अग्रणी महाविद्यालय में पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ व्यावसायिक कोर्स युवाओं के करियर को नई दिशा दे रहे हैं। जिला प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी और कॉलेज प्रभारी डॉ. विनय शर्मा की सजगता, मुस्तैद हेल्प डेस्क और विषय परिवर्तन साक्षात्कार समिति के माध्यम से हर छात्र की समस्या का समाधान परिसर में ही किया जा रहा है।”
प्राचार्य जी के निर्देशानुसार भवदीय डॉ संदीप सबलोक











