आत्मनिर्भर भारत की नींव डॉ. मुखर्जी की औद्योगिक सोच में निहित है : इंजीनियर प्रदीप लारिया

आत्मनिर्भर भारत की नींव डॉ. मुखर्जी की औद्योगिक सोच में निहित है : इंजीनियर प्रदीप लारिया

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रवाद का नया अध्याय लिखा : शैलेन्द्र कुमार जैन

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, संगठन और त्याग का प्रेरणापुंज : श्याम तिवारी

सागर/06.07.2026; भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, महान शिक्षाविद् एवं अखंड भारत के प्रबल समर्थक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन रजाखेड़ी बजरिया में किया गया। सम्मेलन को नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया, सागर विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन एवं भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने सम्बोधित किया।

कार्यक्रम में म.प्र.राज्य कुश कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रभुदयाल पटेल, महापौर संगीता तिवारी, मकरोनिया नपा अध्यक्ष मिहिलाल, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुधा जैन, स्मरण पखवाड़ा टोली के जिला संयोजक जगन्नाथ गुरैया, जिला महामंत्री चेतराम अहिरवार, सुमित यादव, निकेश गुप्ता, विक्रम सोनी, मेघा दुबे, मधुकर जाटव, उमेश गौड़, सुशीला भार्गव, जयंती मोर्य, ऑफिसर यादव, एड.अर्जुन पटेल, अंशुल सिंह परिहार, सौरभ केशरवानी, अंकित तिवारी, अरविंद घोसी, अशोक सिंह ठाकुर मंचासीन रहे। कार्यक्रम में आभार जिला महामंत्री चैन सिंह ने व्यक्त किया एवं मंच संचालन जिला सह मीडिया प्रभारी कपिल कुशवाहा ने किया।

कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल प्रखर राष्ट्रवादी नेता ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के औद्योगिक विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के वास्तविक शिल्पकार थे। उन्होंने राष्ट्रवाद को केवल राजनीतिक विचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि स्वावलंबी भारत की मजबूत आर्थिक नींव रखने का भी कार्य किया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था, तब उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में उन्होंने देश के औद्योगिक विकास की ऐसी आधारशिला रखी, जिसका लाभ आज भारत को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, सिंदरी उर्वरक संयंत्र, हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट (वर्तमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड), औद्योगिक वित्त निगम (आईएफसीआई) सहित अनेक औद्योगिक संस्थानों की स्थापना में डॉ. मुखर्जी की दूरदर्शी सोच परिलक्षित होती है। उन्होंने लघु उद्योगों, भारी उद्योगों और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।

लारिया ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी उत्पादन का जो अभियान पूरे देश में चल रहा है, वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्वावलंबी भारत के स्वप्न का ही विस्तार है। भारत रक्षा उत्पादन, विनिर्माण, रेलवे, आधारभूत संरचना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाकर राष्ट्र निर्माण की इस विकास यात्रा में सहभागी बनें।

सागर विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रवाद के ऐसे युगदृष्टा थे, जिन्होंने अपने अल्पायु में ही असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जन्म एक विद्वान परिवार में हुआ। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी देश के महान शिक्षाविद् एवं न्यायविद् थे, जिनके संस्कारों ने डॉ. मुखर्जी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बनकर डॉ. मुखर्जी ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी। उन्होंने भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने का कार्य किया। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर को भारतीय भाषा में दीक्षांत भाषण के लिए आमंत्रित कर उन्होंने भारतीय भाषाओं के सम्मान का नया अध्याय प्रारंभ किया। उनका स्पष्ट मानना था कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसकी शिक्षा, संस्कृति और मातृभाषा के सम्मान से ही संभव है।

विधायक  जैन ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने सार्वजनिक जीवन में सिद्धांतों को सर्वोच्च स्थान दिया। जब उन्हें लगा कि राष्ट्रहित प्रभावित हो रहा है, तब उन्होंने बिना किसी पद-लालसा के केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर आदर्श राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया। वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने राष्ट्रवादी राजनीति की मजबूत नींव रखी तथा लोकतंत्र में वैचारिक राजनीति को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके आदर्शों और राष्ट्र समर्पण से प्रेरणा लेकर सार्वजनिक जीवन में नैतिकता, मूल्यों और राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।

भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, सिद्धांत, त्याग और संगठन साधना का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि राष्ट्रहित के सामने पद, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत स्वार्थ का कोई महत्व नहीं होता। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब देश अनेक राजनीतिक और वैचारिक चुनौतियों से गुजर रहा था, तब उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सिद्धांत आधारित राजनीति का मार्ग चुना और भारतीय जनसंघ की स्थापना कर राष्ट्रवादी विचारधारा को संगठित स्वरूप प्रदान किया।

तिवारी ने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी जिस वैचारिक शक्ति और संगठनात्मक मजबूती के साथ विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक राजनीतिक दल के रूप में स्थापित है, उसकी आधारशिला डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरुषों ने अपने त्याग, तपस्या और संगठन निर्माण से रखी थी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन प्रत्येक कार्यकर्ता को यह प्रेरणा देता है कि संगठन की वास्तविक शक्ति समर्पित कार्यकर्ताओं, अनुशासन और निरंतर जनसेवा से निर्मित होती है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि वैचारिक जागरण का अभियान है। प्रत्येक कार्यकर्ता अपने बूथ, गांव, वार्ड और मोहल्ले तक पहुंचकर डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, सेवा के संस्कार और राष्ट्र प्रथम की भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी तथा विकसित भारत के निर्माण में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता का सबसे बड़ा योगदान होगा।

Leave a Comment

Read More