
हरित सागर अभियान को मिली नई ऊर्जा, अनुश्री शैलेन्द्र जैन के नेतृत्व में आईएमए सागर ने रोपे पौधे
सागर 10 जुलाई : पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ भविष्य के संकल्प को साकार करने की दिशा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर द्वारा मध्य प्रदेश भाजपा विधि प्रकोष्ठ की प्रदेश संयोजक अनुश्री शैलेन्द्र जैन के अध्यक्षता में मंगलगिरि स्थित अंबेडकर पार्क में एक भव्य वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक एवं जनहितैषी संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की सूत्रधार अनुश्री शैलेन्द्र जैन ने वृक्षारोपण अभियान को सफल बनाने में विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों द्वारा दिए गए सहयोग की प्रशंसा की।
श्रीमती जैन ने प्रधानमंत्री श नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए प्रेरणादायक संदेश “एक पेड़ माँ के नाम” का उल्लेख करते हुए सभी नागरिकों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि माँ के सम्मान और प्रकृति के संरक्षण को जोड़ने वाली यह पहल भावनात्मक एवं सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपनी माँ के नाम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो देशभर में हरित क्रांति का एक नया अध्याय लिखा जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में पौधों का रोपण किया गया तथा उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया गया। इस अवसर पर आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने वृक्षों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय चुनौतियाँ और बढ़ता प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक सामाजिक गतिविधि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। वृक्ष वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने, प्रदूषण को कम करने तथा जलवायु संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. तल्हा साद ने विशेष रूप से सागर शहर के वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) को बेहतर बनाने के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाए तो शहर को अधिक हरित, स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बनाया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से केवल पौधे लगाने ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी भी निभाने का आह्वान किया।
यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, सामूहिक सहभागिता और सतत विकास के संदेश को भी प्रभावी रूप से प्रसारित करने में सफल रहा।










