
नागपंचमी पर खेजरा महाकाल धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, नागचंद्रेश्वर के दर्शन को पहुंचे हजारों श्रद्धालु
सागर। नागपंचमी के पावन अवसर पर सागर जिले के खेजरा स्थित प्रसिद्ध महाकाल धाम खेजरा दरबार में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भगवान महाकाल के साथ भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। दूर-दराज के गांवों और सागर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु खेजरा धाम पहुंचे और भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
बांदरी के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पास स्थित खेजरा धाम अब बुंदेलखंड में तेजी से उभरते प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो रहा है। उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर विकसित इस धाम में महाकाल के साथ नागचंद्रेश्वर की स्थापना भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
नागपंचमी पर विशेष महत्व
हिंदू धार्मिक परंपरा में नागपंचमी का पर्व भगवान शिव और नाग देवता की आराधना से जुड़ा माना जाता है। भगवान नागचंद्रेश्वर को भगवान शिव के विशेष स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। उज्जैन के महाकाल मंदिर में भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर वर्ष में नागपंचमी के अवसर पर विशेष रूप से दर्शन के लिए खोला जाता है। इसी धार्मिक परंपरा से प्रेरित होकर खेजरा धाम में भी भगवान नागचंद्रेश्वर की स्थापना की गई है।
खेजरा धाम में भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर ऊपरी मंजिल पर स्थित है। यहां नागपंचमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और दर्शन का आयोजन किया जाता है। मंदिर से जुड़ी जानकारी के अनुसार यहां भगवान नागचंद्रेश्वर की प्राण-प्रतिष्ठा 7 जुलाई 2024 को रवि पुष्य नक्षत्र में की गई थी।
क्या है भगवान नागचंद्रेश्वर की कथा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नागचंद्रेश्वर भगवान शिव के ऐसे स्वरूप हैं, जिनका संबंध नागराज तक्षक से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव की आराधना और तपस्या की थी। भगवान शिव ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपने सान्निध्य में स्थान दिया।
उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती को नाग की शैय्या पर विराजमान स्वरूप में दर्शाया गया है। सात फनों वाले नाग के नीचे विराजमान शिव-पार्वती की यह प्रतिमा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट मानी जाती है।
इसी धार्मिक स्वरूप और परंपरा को खेजरा धाम में भी श्रद्धा के साथ स्थापित किया गया है। श्रद्धालुओं में यह मान्यता है कि नागचंद्रेश्वर के दर्शन और भगवान शिव की आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। हालांकि कालसर्प दोष या अन्य दोषों से मुक्ति संबंधी बातें धार्मिक मान्यताएं हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चिकित्सा तथ्य नहीं माना जाता।
1904 से जुड़ा है खेजरा धाम का इतिहास
खेजरा धाम का इतिहास केवल वर्तमान भव्य मंदिर तक सीमित नहीं है। उपलब्ध स्थानीय एवं मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस धार्मिक स्थल की पुरानी परंपरा करीब 121 वर्ष पुरानी है। वर्ष 1904 में ब्रह्मलीन पंडित हरप्रसाद तिवारी द्वारा यहां धार्मिक दरबार की स्थापना कराए जाने का उल्लेख मिलता है। यहां काल भैरव और महाकाल की आराधना की परंपरा पहले से चली आ रही थी।
समय के साथ इस छोटे धार्मिक स्थल को भव्य महाकाल धाम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया। इसी संकल्प के तहत मंदिर निर्माण को एक अनूठी प्रक्रिया से आगे बढ़ाया गया।
108 पुष्य नक्षत्रों में बना भव्य महाकाल मंदिर
खेजरा धाम की सबसे अनूठी विशेषता इसके मंदिर निर्माण से जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मंदिर का निर्माण केवल पुष्य नक्षत्र के दौरान किया गया। वर्ष 2013/2015 के आसपास शुरू हुई निर्माण प्रक्रिया कई वर्षों तक चली और कुल 108 पुष्य नक्षत्रों में मंदिर को वर्तमान भव्य स्वरूप दिया गया।
मंदिर को उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर विकसित किया गया है। गर्भगृह, प्रवेश व्यवस्था, दिशा और वास्तु में उज्जैन के महाकाल मंदिर से प्रेरित स्वरूप दिखाई देता है। 2026 में मंदिर के भव्य स्वरूप के पूर्ण होने के बाद खेजरा धाम को बुंदेलखंड के प्रमुख आस्था केंद्र के रूप में नई पहचान मिली है।
सागर से करीब 25 किलोमीटर दूर है खेजरा धाम
महाकाल धाम खेजरा दरबार सागर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर बांदरी क्षेत्र के पास स्थित है। यह स्थान झांसी रोड/राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जुड़ा हुआ है, जिससे सागर और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के लिए यहां पहुंचना आसान है।
नागपंचमी ने बढ़ाई खेजरा धाम की रौनक
नागपंचमी के अवसर पर खेजरा धाम में भक्तों की भीड़ ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। कोई भगवान नागचंद्रेश्वर का जलाभिषेक करने पहुंचा तो किसी ने दूध, बेलपत्र, पुष्प और प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
भगवान महाकाल के जयकारों और हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्हें उज्जैन की धार्मिक परंपरा से प्रेरित नागचंद्रेश्वर स्वरूप के दर्शन अपने ही जिले में करने का अवसर मिला।
बुंदेलखंड में बन रहा नया धार्मिक आकर्षण
खेजरा धाम की विशेषता केवल भव्य मंदिर नहीं बल्कि पुरानी धार्मिक परंपरा, अनूठे निर्माण संकल्प और उज्जैन महाकाल की तर्ज पर विकसित स्वरूप का संगम है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में यह स्थान सागर जिले के साथ-साथ बुंदेलखंड के श्रद्धालुओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है।
नागपंचमी पर उमड़ी भीड़ ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में खेजरा धाम क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
खबर की खास बातें
स्थान — खेजरा धाम दरबार, बांदरी के पास, सागर
️ प्रमुख आराध्य — भगवान महाकाल एवं भगवान नागचंद्रेश्वर
विशेष पर्व — नागपंचमी
मंदिर — उज्जैन महाकाल की तर्ज पर विकसित
निर्माण की विशेषता — 108 पुष्य नक्षत्रों में निर्माण
प्राचीन धार्मिक परंपरा — वर्ष 1904 से जुड़ा उल्लेख
सागर से दूरी — करीब 25 किलोमीटर











