
30 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा, खातों में 5.50 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता; सागर पुलिस की बड़ी साइबर कार्रवाई
सागर, 18 अगस्त 2026। सागर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बेरोजगार एवं सामान्य लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म और म्यूल बैंक खाते खुलवाकर ऑनलाइन सट्टा एवं संदिग्ध वित्तीय लेन-देन करने वाले संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये का सोना, नोट गिनने की मशीन सहित बड़ी संख्या में एटीएम, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
पुलिस जांच में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों का पता चला है। इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि सभी खातों के वित्तीय एवं तकनीकी विश्लेषण के बाद संदिग्ध लेन-देन की वास्तविक राशि और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और स्पष्ट हो सकेगी।
बेरोजगारों को कमीशन का लालच देकर खुलवाते थे खाते
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार और सामान्य लोगों को कमीशन तथा आसान कमाई का लालच देकर उनके आधार सहित अन्य दस्तावेज प्राप्त करते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से फर्जी फर्में तैयार कर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे।
बाद में इन बैंक खातों का नियंत्रण गिरोह अपने हाथ में लेकर उन्हें म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल करता था। इन खातों के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे और साइबर अपराध से प्राप्त रकम का लेन-देन, सर्कुलेशन और नगदी निकासी की जाती थी।
एक शिकायत से खुला करोड़ों के नेटवर्क का राज
13 अगस्त 2026 को मकरोनिया थाना क्षेत्र में रोहित पिता रूपराज पटेल ने शिकायत दी कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नामक फर्जी फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक, मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खोल दिया गया।
पुलिस ने बैंक खाते का तत्काल परीक्षण कराया तो फरवरी 2026 से करीब छह महीने के दौरान खाते में लगभग 90 लाख रुपये का लेन-देन सामने आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सोलंकी के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी मकरोनिया नितिन पाल के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
इसके बाद बैंक खातों, फर्मों, मोबाइल और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े आरोपियों तक पहुंच बनाई।
भोपाल से मुंबई तक फैला नेटवर्क
प्रारंभिक पूछताछ में धर्मेन्द्र नाहर और सोनू दांगी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को नेटवर्क की महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पूछताछ में सामने आया कि धर्मेन्द्र नाहर ने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग से जुड़े काम की जानकारी अमित विश्वकर्मा से मुंबई में सीखी थी।
इसके बाद धर्मेन्द्र ने सागर के सोनू दांगी तथा सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी और स्वर्णेन्द्र पांडे के साथ मिलकर लोगों के नाम पर फर्जी फर्में तैयार कर बैंक खाते खुलवाने का काम शुरू किया।
पुलिस के अनुसार, ऑनलाइन बेटिंग का संचालन रिषभ पटेल द्वारा किया जा रहा था। पुलिस टीम ने रिषभ पटेल को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 2,69,42,700 रुपये नकद और करीब 30 लाख रुपये का सोना बरामद किया।
टेलीग्राम ग्रुप के जरिए चल रहा था ऑनलाइन सट्टा
पूछताछ में पुलिस को ऑनलाइन बेटिंग के संचालन का तरीका भी पता चला। पुलिस के अनुसार आरोपी विभिन्न ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से ग्राहकों को जोड़ते थे।
ग्राहकों को लिंक और क्रेडिट कॉइन उपलब्ध कराकर ऑनलाइन बेटिंग कराई जाती थी। फर्जी फर्मों के बैंक खातों में रकम का ऑनलाइन ट्रांसफर कराया जाता और इसके बाद रकम निकालकर नकदी के रूप में इस्तेमाल की जाती थी।
पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार अमित विश्वकर्मा और रिषभ पटेल को न्यायालय से 8 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। दोनों से नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों और वित्तीय लेन-देन के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
इन फर्जी फर्मों के नाम सामने आए
जांच में अब तक सामने आई फर्मों में—
ग्लैमर इंटरप्राइजेस
भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस
सूर्या इंटरप्राइजेस
समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स
लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर
कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स
स्टार इंटरप्राइजेस
राजपूत इंटरप्राइजेस
अनुभव ट्रेडर्स
सागर ट्रेडर्स
शर्मा जी इंटरप्राइजेस
सौरभ इंटरप्राइजेस
माखन इंटरप्राइजेस
अंकेश इंटरप्राइजेस
तनविक इंटरप्राइजेस
यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स
महाकाल ट्रेडर्स
मैक्स ट्रेडर्स
बालाजी ट्रेडर्स
जय महाकाल टूर एंड ट्रेवल्स
सहित अन्य फर्में शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इनसे जुड़े बैंक खातों में प्रारंभिक तौर पर 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है।
फर्म और बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
सागर पुलिस अब केवल आरोपियों तक सीमित न रहकर फर्जी फर्मों के पंजीयन और बैंक खाते खोलने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों के पंजीयन और बैंक खाते खुलवाने में किसी व्यक्ति अथवा संस्था की भूमिका रही है या नहीं।
यदि किसी स्तर पर लापरवाही या आपराधिक संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
छह आरोपी गिरफ्तार, दो फरार
पुलिस ने मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है—
धर्मेन्द्र नाहर निवासी खजुराहो, हाल सागर
सोनू दांगी निवासी जैसीनगर, सागर
अमित विश्वकर्मा निवासी भोपाल
विपिन गिरी निवासी भोपाल
स्वर्णेन्द्र पांडे निवासी भोपाल
रिषभ पटेल निवासी मंडला, वर्तमान पता भोपाल
वहीं सरमन उर्फ शुभम रैकवार और ऋषि केशव सिंह फरार बताए गए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।
पुलिस की नागरिकों से अपील
सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में किसी को अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी या अन्य बैंकिंग जानकारी उपलब्ध न कराएं।
किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से फर्म या बैंक खाता खुलवाकर उसका संचालन किसी अन्य को सौंपना भी गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी या अवैध वित्तीय लेन-देन में होने पर खाताधारक भी पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस बड़ी कार्रवाई में थाना प्रभारी मकरोनिया निरीक्षक नितिन पाल, थाना प्रभारी बहेरिया उपनिरीक्षक शशिकांत गुर्जर, चौकी प्रभारी बिलहेरा उपनिरीक्षक रामअवतार धाकड़, सउनि काशीराम ठाकुर, साइबर सेल सागर के प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार, आरक्षक हेमेन्द्र ठाकुर सहित पुलिस टीम के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सागर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध, ऑनलाइन बेटिंग और फर्जी बैंक खातों के नेटवर्क पर बड़ी चोट मानी जा रही है। पुलिस अब इस नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगालते हुए इसके अन्य सदस्यों और सहयोगियों तक पहुंचने में जुटी है।











