संगीत से तनाव प्रबंधन का संदेश: राग भैरवी से चिंता और राग दरबारी से अनिद्रा दूर करने पर विशेष व्याख्यान


सागर। मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद से जूझ रहे युवाओं को राहत पहुंचाने तथा उनकी मानसिक एकाग्रता मजबूत करने के उद्देश्य से पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय में ‘संगीत चिकित्सा द्वारा तनाव प्रबंधन’ विषय पर विशेष व्याख्यान सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के मार्गदर्शन में मनोविज्ञान परामर्श केंद्र द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि मन और मस्तिष्क हमारे जीवन एवं शरीर के संचालन का केंद्र हैं। सकारात्मक सोच से जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं, जबकि नकारात्मकता मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भागदौड़ भरे जीवन में संगीत चिकित्सा युवाओं को तनावमुक्त रखने और लक्ष्य प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
धीमा संगीत तनाव कम करने में सहायक
मुख्य वक्ता एवं डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के संगीत विशेषज्ञ डॉ. अवधेश प्रताप तोमर ने संगीत के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘ॐ’ के उच्चारण को मन में सकारात्मकता और ऊर्जा के संचार का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि धीमा संगीत सुनने या बजाने से तनाव से जुड़े कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को 60 से 80 बीपीएम की धीमी लय वाला संगीत सुनने की सलाह देते हुए बताया कि ऐसी लय मानसिक शांति और रिलैक्सेशन में सहायक हो सकती है।
रागों का मनोदशा पर प्रभाव
परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर श्रीमती ममता जैन ने युवाओं से अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत के विभिन्न रागों के मानव मन और भावनाओं पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राग यमन तनाव कम करने और मन को स्थिर करने में सहायक माना जाता है, जबकि राग भैरवी को चिंता एवं उदासी से राहत के संदर्भ में उपयोगी बताया गया। इसी प्रकार राग दरबारी को अनिद्रा और मानसिक थकान में सहायक संगीत के रूप में प्रस्तुत किया गया।
संगीत भावनाओं की अभिव्यक्ति का सुरक्षित माध्यम
संस्कृति फाउंडेशन की सदस्य श्रीमती सुष्मिता ठाकुर ने विद्यार्थियों को जीवन में कम से कम एक वाद्ययंत्र सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संगीत दबी हुई भावनाओं को व्यक्त करने का एक सुरक्षित माध्यम हो सकता है। उन्होंने युवाओं में बढ़ रही भजन क्लबिंग की प्रवृत्ति की भी सराहना की।
ए.आर. स्टूडियो के संस्थापक श्री बलविंदर सिंह ने संगीत को आत्म-नियंत्रण की कला बताते हुए विद्यार्थियों को व्यावहारिक भजन गायन का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम के अंत में मनोविज्ञान परामर्श केंद्र की प्रभारी रेणु सोलंकी ने मंचासीन अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही कार्यक्रम का गरिमामय समापन हुआ।

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