गोगादेव जी महाराज त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक : अविराज सिंह

सागर। युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि गोगादेव जी महाराज त्याग, शौर्य, साहस और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। ग्यारहवीं शताब्दी में जन्मे गोगादेव जी महाराज नाथ संप्रदाय की योग परंपरा के साथ क्षत्रिय वीरता और शौर्य के भी प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने अपने जीवन को भारत माता की रक्षा के लिए समर्पित किया और महमूद गजनवी की सेना से युद्ध करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। सागर बागड़ महोत्सव के अंतर्गत आयोजित भव्य झंडा-निशानों के चल समारोह एवं मेले में सहभागिता करते हुए अविराज सिंह ने कहा कि ऐसे महापुरुषों के जीवन और विचारों से राष्ट्रभक्ति, त्याग और समाज सेवा की प्रेरणा मिलती है।

अविराज सिंह ने कहा कि गोगादेव जी महाराज का साम्राज्य पंजाब से लेकर हरियाणा तक विस्तृत था और वे अपने समय के शक्तिशाली शासकों में शामिल थे। जब महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किया, तब गोगादेव जी महाराज ने उसकी विशाल सेना का सामना करते हुए भारत माता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि मां और मातृभूमि हम सभी के लिए स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। गोगादेव जी महाराज इस विचार के प्रतीक हैं कि क्षत्रिय केवल राजसत्ता अथवा महलों का आनंद लेने के लिए नहीं होते, बल्कि उनका दायित्व समाज और राष्ट्र की रक्षा करना तथा आवश्यकता पड़ने पर मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का बलिदान देना भी है।

उन्होंने कहा कि गोगादेव जी महाराज ने गौ माता की रक्षा के लिए भी अपना जीवन समर्पित किया। उनके दिव्य निशान और ध्वज जब शहरों में भ्रमण करते हैं तो वातावरण में राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसे आयोजनों से लोगों में सनातन धर्म के प्रति आस्था, धार्मिक चेतना तथा राष्ट्र के प्रति त्याग और समर्पण की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक गांव और प्रत्येक भारतीय के मन में देश के लिए त्याग, समर्पण और देशभक्ति की भावना दिखाई देती है, ऐसे वीर महापुरुषों के कारण ही समाज उन्हें देवता के रूप में सम्मान देता है।

अविराज सिंह ने कहा कि गोगादेव जी महाराज ने गुरु गोरखनाथ जी महाराज की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाते हुए आगे बढ़ने का कार्य किया। आज आवश्यकता है कि हम भी उनके विचारों को आगे ले जाएं और मिलकर राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि विनम्रता, सादगी और राष्ट्रभक्ति के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। समाज और राष्ट्र के लिए समर्पण की भावना ही महापुरुषों के जीवन से मिलने वाली सबसे बड़ी प्रेरणा है।

उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में सम्मान और प्रसिद्धि केवल धन कमाने अथवा संपत्ति अर्जित करने वालों को नहीं मिली, बल्कि उन लोगों को मिली जिन्होंने अपनी संपत्ति और सामर्थ्य को समाज सेवा तथा राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित किया। ऐसे महापुरुषों का ही देश में सम्मान रहा है, जिन्होंने अपने संसाधनों का उपयोग समाज के कल्याण और राष्ट्र निर्माण के लिए किया। उन्होंने कहा कि धन को चुराया जा सकता है, छीना जा सकता है और उसका बंटवारा भी हो सकता है, लेकिन ज्ञान ऐसी संपत्ति है जो व्यक्ति की हमेशा रक्षा करता है।

अविराज सिंह ने कहा कि आज समाज के युवाओं को केवल धन अर्जित करने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय ज्ञान अर्जित करने, अपनी योग्यता बढ़ाने और चरित्रवान बनने पर ध्यान देना चाहिए। धन की रक्षा व्यक्ति को करनी पड़ती है, लेकिन ज्ञान और चरित्र हमेशा व्यक्ति की रक्षा करते हैं। गोगादेव जी महाराज का जीवन हमें सिखाता है कि व्यक्ति के भीतर ज्ञान, चरित्र, साहस और नई सोच होनी चाहिए। युवाओं में नवाचार, नया दृष्टिकोण और नए विचार विकसित होना आवश्यक है, ताकि वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।

उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल अपने लिए जीना नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा करना और जरूरतमंदों की सहायता करना होना चाहिए। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सेवा का कोई न कोई कार्य अवश्य करना चाहिए। दूसरों की सहायता और समाज के कल्याण के लिए कार्य करना ही जीवन का वास्तविक अर्थ है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का जीवन हमें यही संदेश देता है कि व्यक्ति को अपनी क्षमता और संसाधनों का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करना चाहिए।

अविराज सिंह ने कहा कि आज के समय में युवाओं को अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहना होगा। राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव रखते हुए हमें अपने कार्यों को पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए। गोगादेव जी महाराज के जीवन से साहस, त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा लेकर युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास, महापुरुषों के त्याग और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियां जीवन में संघर्ष और कर्तव्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देती हैं। चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण कर्तव्य के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना है और किसी भी परिस्थिति में निराश होकर हार नहीं माननी चाहिए। इसी संकल्प के साथ राष्ट्र और समाज की सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर धर्म प्रचार सेवा मंडल, कटरा यातायात पुलिस चौकी के बाजू में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा साथी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गोगादेव जी महाराज के झंडा-निशानों के चल समारोह एवं मेले में लोगों ने सहभागिता की।

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