राष्ट्रीय सेमिनार में गूंजा ‘वंदे मातरम्’, युवाओं को राष्ट्रभक्ति और गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का संदेश


सागर। वंदे मातरम् के 150वें जयंती वर्ष के अवसर पर शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय, सागर में पीएम उषा सॉफ्ट कंपोनेंट परियोजना के अंतर्गत “जनमानस का केंद्र बिंदु: वंदे मातरम्” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन मुख्य अतिथि तथा रानी अवंतीबाई राजकीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विनोद कुमार मिश्र अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने कहा कि “वंदे मातरम् महज गीत नहीं, बल्कि भारत माता की पावन स्तुति और राष्ट्र चेतना का उद्घोष है।” उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् राष्ट्रभक्ति, प्रतिरोध और जनजागरण का सशक्त माध्यम बना। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान रखते हुए उन्हें कंठस्थ करने का आह्वान किया।
कुलगुरु प्रो. विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक नींव उसका इतिहास होता है। युवाओं को भारत के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने वंदे मातरम् और भारत माता की जय को स्वाभिमान एवं एकात्मभाव की अभिव्यक्ति बताया।
मुख्य वक्ता एवं सामाजिक समरसता संघ के क्षेत्रीय संयोजक सुनील देव ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में इसका सार्वजनिक गायन हुआ था। इसके बाद 1905 के बंग-भंग एवं स्वदेशी आंदोलन के दौरान यह जन-जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा शक्ति बना। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण से ही भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर होगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ। छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया।
महंत केशवगिरी जी महाराज ने युवाओं को अपने कर्तव्यों पर आत्ममंथन करने तथा वरिष्ठजनों के अनुभवों से मार्गदर्शन लेने की सलाह दी। प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों एवं सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। पीएम उषा परियोजना की संयोजक डॉ. इमराना सिद्दीकी ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
सेमिनार के दौरान राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित पूर्व राष्ट्रीय सेमिनार “एकात्म मानव दर्शन विकसित: भारत 2047” पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। स्वतंत्रता दिवस की जिला स्तरीय परेड में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली एनसीसी यूनिट्स तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय सेमिनार के विभिन्न वैचारिक सत्रों में वक्ताओं ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रवादी पक्षों पर विचार रखे। द्वितीय सत्र में “वंदे मातरम् : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा शक्ति” विषय पर चर्चा के साथ कवि सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें प्रसिद्ध शायर अशोक मिज़ाज़, आदर्श दुबे सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी।
समापन सत्र में वुमन राइट्स संस्था की प्रदेश अध्यक्ष अनुश्री शैलेंद्र जैन ने कहा कि जन्मभूमि जननी से भी बढ़कर होती है और वंदे मातरम् इसी उदात्त राष्ट्रभावना का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए वंदे मातरम् आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित कर सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को उपहार देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक, शिक्षक, कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सेमिनार ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता, स्वाभिमान और भारत के गौरवशाली स्वतंत्रता इतिहास के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

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