भाजपा द्वारा आयोजित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन दर्शन पर हुई चर्चा

भाजपा द्वारा आयोजित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन दर्शन पर हुई चर्चा

सांसद लता वानखेड़े,विधायक प्रदीप लारिया,जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी एवं सुखदेव मिश्रा ने किया संबोधित

सागर.

महाराज विक्रमादित्य और सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में जिस तरह से सांस्कृतिक उत्थान का काम हुआ, वैसा ही काम रानी अहिल्याबाई ने भी किया। आज वही काम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी कर रहे हैं। भारत के बारे में यह भ्रम फैलाया जाता है कि यहां महिलाओं को वेद पढ़ने की अनुमति नहीं थी, शिक्षा नहीं दी जाती थी, पर्दे में रहना पड़ता था। लेकिन ये देश भूल जाते हैं कि पश्चिमी देशों में जब महिलाओं से घृणा की जाती थी, तब भारत में रानी अहिल्याबाई के रूप में एक महिला शासन संभाल रहीं थीं। यह बात सांसद लता वानखेड़े ने लोक माता अहिल्याबाई की 300 वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में भाजपा द्वारा उनके जीवन दर्शन पर ग्रंथाय एजुकेशन सेंटर में आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

कार्यक्रम को जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी, नरयावली विधायक इंजी.प्रदीप लारिया,आयोजन समिति जिला संयोजक सुखदेव मिश्रा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की विषय प्रस्तावना डायरेक्टर विवेक छिरोलिया ने प्रस्तुत की।

सांसद लता वानखेड़े ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बीच सुशासन कैसे चलाया जा सकता है, इसका उदाहरण उन्होंने प्रस्तुत किया। उन्होंने पूरे समर्पण के साथ जनता की सेवा की और वे किसी से डरती नहीं थी। उनका व्यक्तित्व, मन और हृदय विशाल था। उन्होंने 300 साल पहले औद्योगीकरण और रोजगार के बारे में सोचा। सैनिकों और उनके परिवारों की भलाई के लिए कदम उठाए। उन्होंने अपने शासन में समावेशी सिद्धांत को पोषित किया, इसलिए उनके शासन में हर व्यक्ति को अहसास रहता था कि महारानी उसकी चिंता करती हैं। उन्होंने अपने निर्णयों से यह साबित किया कि कानून के सामने सब बराबर हैं। उन्होंने अपनी नीतियों में मानव अधिकारों का संरक्षण किया और हर व्यक्ति को न्याय मिल सके, इसके लिए न्यायालय स्थापित करने तथा न्यायाधीशों के प्रशिक्षण पर जोर दिया। न्यायालयों की मानीटरिंग की व्यवस्था की और वे नियमित समीक्षा भी करती थीं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा नीति बनाई और यह स्थापित किया कि जहां धर्म है, वहीं न्याय है। शासन और धर्म अलग नहीं है। उन्होंने अपने कामों से इतिहास में एक आदर्श स्थापित किया।

जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300 वीं जन्म जयंती पर हम उनके बिंदू से विराट तक की यात्रा को स्मरण करते हुए उनके आद्शों पर चल रहे है। वह अपनी धर्म परायणता, न्यायप्रियता, परोपकार और राष्ट्रनिष्ठा के लिए जानी जाती है। मां अहिल्या नारी नेतृत्व, सेवा और न्याय से सजी शक्ति की अनुपम प्रेरणा है

विधायक इंजी. प्रदीप लारिया ने कहा कि देवी अहिल्याबाई होल्कर के सपनों को पूरा करने का काम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी कर रहे हैं। देवी अहिल्याबाई ने इंदौर से पूरे देश का उत्थान कर चारों धामों, सप्तपुरी, अयोध्या का राम मंदिर, रामेश्वरम, काशी विश्वनाथ सहित देशभर में तीन हजार से ज्यादा मंदिरों का जीर्णोंद्धार का काम कर भारत को सजाने का काम किया था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में चारों धामों को जोड़ने, बौद्ध और जैन सर्किट सहित सात हजार से ज्यादा मंदिरों का निर्माण और जीर्णोंद्धार का कार्य किया जा रहा है। देवी अहिल्याबाई होल्कर ने कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जल-जीवन मिशन के तहत हर घर में नल-जल योजना के तहत पानी पहुंचाने का काम किया है। देवी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी में मणिकर्णिका घाट सहित बड़ी संख्या में घाटों का निर्माण किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी देशभर में मार्गों और घाटों का निर्माण करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्याबाई होल्कर ने गरीबों के भोजन के लिए अन्न क्षेत्रों की व्यवस्था की। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 80 करोड़ लोगों के लिए राशन की व्यवस्था की है। देवी अहिल्याबाई होल्कर के लिए ‘धर्म ही राजधर्म और प्रजा की सेवा ही पूजा’ थी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी देश की 140 करोड़ की जनता की सेवा को पूजा मानते हैं। देवी अहिल्याबाई होल्कर ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का जो सपना 18वीं सदी में देखा था, उसे आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पूरा कर रहे हैं। देवी अहिल्याबाई होल्कर को आज हम 21वीं सदी में याद कर उनके बताए गए मार्गों पर चलने का प्रयास कर रहे हैं यह इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने जो कुछ किया वो अद्भुत और अकल्पनीय था।

दस दिवसीय आयोजन के जिला संयोजक सुखदेव मिश्रा ने कहा कि मां अहिल्या बाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र कि एक छोटे से गांव चौडी में हुआ था। इनके पिता मनकोजी शाव मराठा सेना में सिपाही थे। मात्र 12 की आयु में राजवधु बनकर इंदौर आई थी। अहिल्याबाई की उम्र मात्र 29 वर्ष की आयु में उनके पति की मृत्यु हुई और वे वे पति की चिता के साथ सती होना चाहती थी, लेकिन ससुर मल्हार राव जी ने बच्चों और स्वयं की देखरेख का वास्ता देकर उन्हे रोक लिया था, मात्र 42 वर्ष की उम्र में स्वजनों की मृत्यु के वज्रपात को सहन करते हुए मां अहिल्या ने जीवन संघर्ष जारी रखा मां अहिल्या ने अपना सारा जीवन शिव जी को समर्पित करके व्यतीत किया।

कार्यक्रम का संचालन भूमिका अहिरवार रोहिणी अहिरवार ने किया आभार कार्यक्रम संयोजक चैन सिंह ठाकुर एवं विक्रम सोनी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष मिहीलाल अहिरवार,जनभागीदारी अध्यक्ष बंटी राठौर,जिला कोषाध्यक्ष अध्यक्ष निकेश गुप्ता जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन मंडल अध्यक्ष अंकित तिवारी, जय सोनी,अभिमन्यु सोनी, हर्ष केशरवानी सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहीं।

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