देवरी नगर में 47वें श्री रामचरितमानस सम्मेलन का शुभारंभ, अहिल्या उद्धार की आध्यात्मिक कथा से भावविभोर हुए श्रोता

देवरी नगर में 47वें श्री रामचरितमानस सम्मेलन का शुभारंभ, अहिल्या उद्धार की आध्यात्मिक कथा से भावविभोर हुए श्रोता
देवरी। देवरी नगर में स्वतंत्र मानस सम्मेलन के तत्वावधान में आयोजित श्री रामचरितमानस सम्मेलन के 47वें वर्ष का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हुआ। सम्मेलन के प्रथम दिवस चित्रकूट से पधारे हनुमत द्वार पीठाधीश्वर जगद्गुरु धीरेन्दाचार्य जी महाराज ने अहिल्या उद्धार की भावपूर्ण कथा का श्रवण कराया।
जगद्गुरु धीरेन्दाचार्य जी महाराज ने कथा के माध्यम से अहिल्या उद्धार के आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि अहिल्या हमारी आत्मा का प्रतीक हैं, जो अज्ञान, अहंकार और माया के कारण अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाती है। पत्थर की शिला अहंकार और मोह का प्रतीक है, जबकि भगवान राम परमात्मा और हमारे वास्तविक स्वरूप का बोध कराते हैं। प्रभु श्रीराम की कृपा से अहिल्या का उद्धार यह संदेश देता है कि भगवान के नाम और भक्ति से आत्मा का कल्याण संभव है।
कथा में बताया गया कि गौतम ऋषि गुरु और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के प्रतीक हैं, इंद्र देव चंचल मन का, और भगवान राम का चरण-स्पर्श अहंकार व माया के नाश का संकेत है। अहिल्या उद्धार की यह कथा श्रोताओं को पापों से मुक्त होकर प्रभु श्रीराम की भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।प्रथम दिवस की कथा में पं. श्री प्रभु दयाल जी पाठक एवं मानस माधुरी अंजनी देवी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए और रामभक्ति का महत्व बताया।
कथा श्रवण हेतु बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से अरविंद शांडिल्य, सतीश राजौरिया, लखनलाल चौबे, नंदकिशोर उदैनिया, अनिल ढिमोले, अनुराग ज्योतिषी, महेंद्र पलिया, अनिल दुबे शास्त्री, परसोत्तम शास्त्री, गौतम बारोलिया, शिवनंदन मिश्रा सहित सैकड़ों की संख्या में भक्तजन मौजूद रहे।
रामनाम और भक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में सम्मेलन का प्रथम दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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