
मानवता की सर्वोच्च सेवा: सुगंधी बाई ने मरणोपरांत किया नेत्रदान और देहदान
शोक के क्षणों में भी परिवार ने निभाया माता का ‘महादान’ का संकल्प
सागर | 22 अप्रैल, 2026 मोतीनगर क्षेत्र की निवासी 72 वर्षीया श्रीमती सुगंधी बाई जैन के निधन ने पूरे शहर को शोकाकुल कर दिया, किंतु उनके पीछे छूटे पदचिन्हों ने मानवता को एक नई राह दिखाई है। भाग्योदय अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस लेने वाली सुगंधी बाई ने अपनी मृत्यु के पश्चात न केवल दो लोगों की दुनिया रोशन की, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के शोध हेतु अपनी देह भी समर्पित कर दी।
दो अंधियारी जिंदगियों में उजियारा:
अपनी माता की अंतिम इच्छा का मान रखते हुए पुत्र नितिन जैन, निशांत जैन और पुत्री नेहा जैन, दामाद सुरेन्द्र जैन, देवर चक्रेश सिंघई ने तत्काल ‘आई बैंक’ से संपर्क किया। बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय की टीम ने सफलतापूर्वक कोर्निया संरक्षित किया।
नेत्रदान के पश्चात, परिजनों ने दिवंगत सुगंधी बाई के पार्थिव शरीर को बीएमसी के एनाटॉमी विभाग को सौंप दिया। यह चिकित्सा छात्रों के प्रशिक्षण के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मान:
मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ जैन ने बताया कि शासन के विशेष प्रोटोकॉल के तहत, इस महान त्याग के लिए उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। यह बीएमसी सागर में इस श्रेणी का छठा देहदान है।
बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर ने कहा कि शोक की इस घड़ी में जैन परिवार का यह निर्णय अनुकरणीय है। देहदान से बड़ा कोई दान नहीं है, क्योंकि एक मृत शरीर भविष्य के कई डॉक्टरों को जीवन बचाने की शिक्षा देता है। पूरा महाविद्यालय परिवार इस पुण्य कार्य के लिए सदैव आभारी रहेगा।
चिकित्सा टीम का योगदान
इस पूरी प्रक्रिया को आई बैंक इंचार्ज डॉ. सारिका चौहान, डॉ. रोशी जैन, डॉ. आयुषी मोदी और उनकी समर्पित टीम ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ संपन्न कराया। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों की इस पहल को समाज के लिए एक “प्रेरणापुंज” बताया है।











