
किताबें जीवन का पथ-प्रदर्शक होती हैं, विद्यार्थी इनसे दोस्ती करना सीखें- कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर
सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में ‘विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस’ के उपलक्ष्य में “फ्रॉम माइंड टू मार्केट: अंडरस्टैंडिंग द आईपीआर बास्केट” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुस्तकालय भवन के सामने मुक्ताकाश परिसर में सामूहिक पुस्तक का वाचन भी किया गया. इस आयोजन में कुलपति प्रो. वाय एस ठाकुर, कुलसचिव डॉ. सत्य प्रकाश उपाध्याय, उपकुलसचिव सतीश कुमार सहित कई शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की.
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि पुस्तकें पढना एक अच्छी आदत है. आज नई तकनीक के युग में लोग किताबों से दूर होते जा रहे हैं. आज भले ही तकनीक ने मोबाइल और कंप्यूटर पर सभी ज्ञान सामग्री उपलब्ध करा दी हो लेकिन किताबों का कोई विकल्प नहीं है. पुस्तकें हमारी मित्र की तरह होती हैं. यह न केवल ज्ञान प्रदान करती हैं बल्कि हमें जीवन जीने की कला भी सिखाती हैं. उन्होंने कहा कि हैरी पॉटर जैसी पुस्तक दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुस्तकों में शामिल हुई. यह रिकॉर्ड यह बताता है कि पुस्तकों का महत्त्व अभी भी बना हुआ है. उन्होंने कहा की उपन्यास, कहानी की पुस्तकें न केवल हमें आनंद प्रदान करती हैं बल्कि हमारे पढ़ने की रूचि को जाग्रत करती हैं. यह हमें समय के इतिहास और घटनाओं से भी परिचय करती हैं. हमारी सृजनशीलता और कल्पनाशीलता को बढ़ाती हैं. पुस्तकालय को इसीलिये ज्ञान का भंडार कहा जाता है. उन्होंने विद्यार्थियों को किताबों से दोस्ती करने की सलाह देते हुए कहा कि किताबें जीवन का पथ-प्रदर्शक होती हैं, विद्यार्थी इनसे दोस्ती करना सीखें.
मुख्य वक्ता आई सी ए एस टी के प्रमुख डॉ. शिवराम बी. एस. ने बताया कि कैसे अपने मौलिक विचारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान कर उन्हें व्यावसायिक सफलता में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा मानव मस्तिष्क की रचनाओं का प्रतिनिधित्व करती है, और ऐसी रचनाओं की सुरक्षा नवाचार को बढ़ावा देने, स्वामित्व सुनिश्चित करने और व्यावसायीकरण को सक्षम बनाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने बौद्धिक संपदा (आईपी) को एक विचार या रचना के रूप में बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत प्रदान की जाने वाली कानूनी सुरक्षा के रूप में परिभाषित किया। ‘आईपीआर बास्केट’ के बारे में बताते हुए उन्होंने कॉपीराइट, पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन, भौगोलिक संकेत और व्यापार रहस्य जैसे प्रमुख बिन्दुओं को शामिल किया । शैक्षणिक संदर्भों में कॉपीराइट पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि यह विद्वानों के कार्यों की सुरक्षा करता है, लेखकों के नैतिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा करता है, और अकादमिक प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने ब्रांडिंग में ट्रेडमार्क, उत्पाद सौंदर्यशास्त्र में औद्योगिक डिजाइन और क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों के संरक्षण में भौगोलिक संकेतकों की भूमिका पर भी चर्चा की ।
कार्यक्रम का संचालन और स्वागत संबोधन पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. मोहन टी. ए. द्वारा किया गया। सेंट्रल लाइब्रेरी की पूरी टीम के सक्रिय सहयोग से इस अवसर पर ड्राइंग, डिजाइनिंग और ओपन बुक रीडिंग जैसी रचनात्मक प्रतियोगिताएं भी संपन्न हुईं। इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को कुलपति एवं अन्य अतिथियों द्वारा पुरस्कृत भी किया गया.











