
विश्वविद्यालय : एक दिवसीय वन्यजीव अपराध संवेदीकरण कार्यक्रम हुआ आयोजित
वन्यजीवों से प्रेम का अर्थ उन्हें घर में पालना नहीं, अपितु उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित एवं स्वतंत्र जीवन सुनिश्चित करना है
सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के अपराधशास्त्र एवं न्यायिक विज्ञान विभाग में ‘एक दिवसीय वन्यजीव अपराध संवेदीकरण कार्यक्रम’ आयोजित किया गया। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, भोपाल से आये अधिकारी, डॉ. किशोर कुमार शर्मा एवं इंजी. नदीम हुसैन के द्वारा वन्यजीव अपराधों को रोकने और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिसमें उन्होंने वन्यजीव क्या हैं? वन्यजीव के अपराध कैसे होते हैं? जाने-अनजाने में हम उन अपराधों को बढ़ावा कैसे दे रहे हैं? और इन अपराधों पर कार्यवाही किस प्रकार होती हैं? इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य ‘वन्यजीव अपराध की कार्यवाही में अपराधशास्त्र एवं न्यायिक वैज्ञानिक की निष्पक्ष भूमिका’ पर केंद्रित था। जैसे एक न्यायिक वैज्ञानिक घटना स्थल पर पहुंच कर किस प्रकार जांच करते हैं और चैन ऑफ़ कस्टडी को कैसे बनाये रखते है। वन्यजीव अपराध स्थल की जांच के मुख्य चरण जैसे- पहला: घटना स्थल को सुरक्षित करना, दूसरा: घटना स्थल का ध्यानपूर्वक निरीक्षण एवं सर्वेक्षण करना, तीसरा: डॉक्यूमेंटेशन एवं फोटोग्राफी करना, चौथा: साक्ष्यों की खोज और संग्रह करना, पांचवा: घटना स्थल पर ही मौलिक परिक्षण करना और सामान्य राय बनाने के बारे में छात्रों को विस्तार से समझाया ।
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो से पधारे अधिकारियों ने अपने साथ लगभग 35 वन्यजीव से संबंधित नमूने जैसे विभिन्न वन्यजीवों की खाल, दांत, नाखून, हड्डियाँ, संरक्षित लकड़ियों के नमूने तथा ट्रॉफियाँ प्रदर्शित किए। इन प्रतिरूपों के माध्यम से विद्यार्थियों ने वन्यजीव अपराधों से संबंधित सैद्धांतिक अवधारणाओं का व्यावहारिक अध्ययन किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि केवल घरेलू पशु पालने से कोई व्यक्ति पशु प्रेमी या वन्यजीव प्रेमी नहीं बन जाता। वास्तविक वन्यजीव प्रेम उनके प्राकृतिक आवास, जैव विविधता एवं पर्यावरण के संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व में निहित है। अगर वास्तविक रूप से वन्यजीव प्रेमी बनना है तो उनके अच्छे जीवन के लिए इस पर्यावरण को अनुरूप रखना होगा।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. वाई. एस. ठाकुर द्वारा की गई। प्रो. देवाशीष बोस ने अतिथियों का स्वागत किया एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। विभागाध्यक्ष प्रो. ममता पटेल द्वारा आभार भाषण दिया गया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकगण डॉ. वंदना विनायक, डॉ. एस.एम. महेंद्र सिम्हा करना, डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. विवेक मेहता, डॉ. मुकेश कुमार चौरसिया एवं अन्य विभाग से पधारे शिक्षकगण – डॉ. अभिलाषा दुर्गबंशी, रसायन विज्ञान विभाग एवं डॉ. केशव टेकाम, विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग उपस्थित रहे. कार्यक्रम में विभाग के शोधार्थियों तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शोध विद्वान, विभाग के कर्मचारी और सभी छात्रों के सहयोग से कार्यक्रम सफल हुआ।










