श्रावणी उपाकर्म सानंद संपन्न, नर्मदा तट वेद मंत्रों से गुंजायमान रहा

श्रावणी उपाकर्म सानंद संपन्न, नर्मदा तट वेद मंत्रों से गुंजायमान रहा वैदिक परम्परा का अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार श्रावणी उपाकर्म क्षेत्र के वैदिक ब्राह्मणों द्वारा नर्मदा दक्षिण तढट सतधारा पर सम्पन्न किया गया। सभी ब्राह्मणों ने विधिवत जलाशय कर्म में तीर्थ पूजन, पंचगव्य प्राशन, ज्ञात-अज्ञात समस्त पाप दोषों की निवृत्ति के लिए हेमाद्रि संकल्प, गण स्नान किया। भस्म, मृत्तिका, गोमय दशविध आदि से स्नान के बाद अपामार्ग, कुशा, दूर्वा आदि से मार्जन किया। स्नानांग तर्पण, आदि क्रियाओं के बाद—
संस्कार स्वाध्याय के क्रम में गणेश कलश पूजन उपरांत सप्तर्षियों का पूजन किया गया। यज्ञोपवीत का विधिवत पूजन कर सभी विद्वानों ने देवताओं और अपने पितरों को यज्ञोपवीत समर्पित करके नवीन यज्ञोपवीत धारण किया। ऋषि तर्पण के साथ ऋषि वंश वाचन, अध्ययन क्रम में वेद मंत्र पाठ, ऋषि श्राद्ध के बाद देव विसर्जन किया गया। यह आयोजन नर्मदा क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्वान आचार्य गणेश जी ने वेद विधि के साथ सम्पन्न कराया।
आचार्य अनिल दुबे वैदिक ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म सनातन का अति महत्वपूर्ण महापर्व है। श्रावणी उपाकर्म ज्ञात-अज्ञात पापों के प्रायश्चित, सुसंस्कारों के विकास, स्वाध्याय एवं वैदिक ज्ञान की प्रेरणा देने वाला पर्व है। इसमें कर्मकांड, पूजन-पाठ से जुड़े लोगों के अलावा अन्य सभी द्विजों और हमारी नई पीढ़ी को भी सम्मिलित होना चाहिए।
श्रावणी उपाकर्म के तीन पक्ष हैं—संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय। सर्वप्रथम हेमाद्रि संकल्प में ज्ञात-अज्ञात गुरु, लघु, स्थूल, सूक्ष्म पापों और दोषों की निवृत्ति के लिए प्रायश्चित गण स्नान किया जाता है। संस्कार पक्ष में ऋषि पूजन, तर्पण, यज्ञोपवीत पूजन एवं नूतन यज्ञोपवीत धारण, ऋषि श्राद्ध तथा स्वाध्याय पक्ष में ऋषि वंश का वाचन एवं वेदों के स्वाध्याय की परम्परा है। कार्यक्रम संपन्न होने के पश्चात श्री बालाजी मोटर्स एंड टेक्ट्ररर्स आशीष दुबे जी की तरफ से सभी ब्राह्मणो का सम्मान स्वल्पाहार एवं दक्षिणा वितरण की गई,कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ अनिल दुबे वैदिक, सतेन्द्र पचौरी, प्रकाश दुबे, सौरभ पचौरी, निशांत पचौरी, दिवाकर शास्त्री, प्रभाकर शास्त्री, मुकेश जी पंकज जी, धर्मेंद्र जी सहित सैकड़ों विप्र बंधुओं ने भाग लिया।

Leave a Comment

Read More