
देवरी। सागर जिले की देवरी विधानसभा क्षेत्र में संचालित शासकीय छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। गौरझामर, महाराजपुर, सहजपुर, टड़ा और केसली क्षेत्र के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा, अधीक्षकों की रात्रिकालीन उपस्थिति, छात्रावासों में आने वाली शासकीय राशि के उपयोग तथा विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण को लेकर जांच की मांग उठ रही है।
मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग की एकीकृत छात्रावास योजना के तहत विद्यार्थियों को आवास, भोजन, बिजली-पानी, फर्नीचर, बिस्तर सामग्री, पुस्तकालय और अन्य आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। योजना में छात्रावास अधीक्षक पद को भी जिम्मेदारी से जोड़ा गया है।
रात में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थी रात के समय भी विभाग की जिम्मेदारी में रहते हैं। विशेषकर बालिका और आदिवासी छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। किसी विद्यार्थी की तबीयत अचानक खराब होने, दुर्घटना होने या किसी अन्य आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध होना जरूरी है।
इसी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित छात्रावासों के अधीक्षक रात में छात्रावास परिसर में रहकर विद्यार्थियों की देखरेख कर रहे हैं या अपने घरों पर रहते हैं?
यदि विभागीय आदेश के अनुसार संबंधित अधीक्षकों के लिए छात्रावास में रात्रि निवास अथवा निर्धारित उपस्थिति अनिवार्य है, तो इसकी वास्तविक स्थिति की जांच रात्रिकालीन औचक निरीक्षण से आसानी से की जा सकती है।
अधिकतर अधीक्षक घर पर रहते हैं—दावे की हो जांच
क्षेत्र से यह आरोप सामने आ रहा है कि कई छात्रावासों के अधीक्षक रात्रि के समय छात्रावास में उपलब्ध नहीं रहते और अपने घरों से व्यवस्था संचालित करते हैं। हालांकि इस दावे की वास्तविकता सामने लाने के लिए विभाग को संबंधित छात्रावासों के रात्रि उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट, निरीक्षण पंजिका और आकस्मिक निरीक्षण रिपोर्ट की जांच करनी चाहिए।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हर साल आने वाली शासकीय राशि के खर्च पर भी सवाल
छात्रावासों में भोजन, सामग्री, रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं के लिए सरकारी राशि खर्च की जाती है। ऐसे में दूसरा बड़ा सवाल छात्रावासों के बजट और उसके उपयोग को लेकर है।
देवरी विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक शासकीय छात्रावास को वित्तीय वर्ष 2025-26 में कितनी राशि मिली, कितनी राशि खर्च हुई और किस-किस मद में खर्च की गई—इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है।
विभागीय रिकॉर्ड में छात्रावास योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृति और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं MPTAAS के माध्यम से संचालित होने का उल्लेख है।
ऐसे में प्रशासन को प्रत्येक छात्रावास के आवंटन आदेश, व्यय विवरण, बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, भोजन व्यवस्था के रिकॉर्ड और भुगतान विवरण का मिलान कराना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ या नहीं।
सहायक आयुक्त के निरीक्षण पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी उठ रहा है। क्षेत्र में चर्चा है कि सागर जिले की जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त द्वारा देवरी विधानसभा क्षेत्र के छात्रावासों का नियमित और रात्रिकालीन निरीक्षण कितनी बार किया गया?
यदि निरीक्षण हुए हैं तो उनकी निरीक्षण पंजिका और रिपोर्ट में क्या कमियां दर्ज की गईं और उन कमियों पर क्या कार्रवाई हुई?
यदि निरीक्षण लंबे समय से नहीं हुए हैं, तो यह भी विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
रात में अचानक निरीक्षण हो तो सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
छात्रावासों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रशासन द्वारा दिन के बजाय रात में अचानक निरीक्षण किया जाना अधिक प्रभावी हो सकता है। निरीक्षण के दौरान अधीक्षक की उपस्थिति, विद्यार्थियों की संख्या, भोजन व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, बिजली-पानी तथा आवश्यक रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।
साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष के बजट और खर्च का भौतिक सत्यापन एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए तो सरकारी राशि के उपयोग की स्थिति भी स्पष्ट हो सकती है।
प्रशासन से उठ रहे प्रमुख सवाल
- देवरी विधानसभा के संबंधित छात्रावासों में अधीक्षक रात्रि के समय मौजूद रहते हैं या नहीं?
- पिछले एक वर्ष में सहायक आयुक्त एवं जिला अधिकारियों ने कितने छात्रावासों का निरीक्षण किया?
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रत्येक छात्रावास को कितना बजट मिला?
- कितनी राशि खर्च हुई और किन मदों में खर्च की गई?
- खरीदी गई सामग्री का भौतिक सत्यापन हुआ या नहीं?
- क्या रात्रिकालीन निरीक्षण की कोई व्यवस्था है?
- यदि किसी छात्रावास में नियमों का उल्लंघन मिला तो अब तक क्या कार्रवाई की गई?
छात्रावासों में रहने वाले बच्चे सरकार की जिम्मेदारी हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा, अधीक्षकों की उपस्थिति और सरकारी बजट के पारदर्शी उपयोग की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इन सवालों पर कब तक जवाब देता है।






