एलपीजी गैस रिसाव, आग, बाढ़ और भूकंप जैसी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का दिया प्रशिक्षण, हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देकर युवाओं को किया जागरूक
सागर, 13 अक्टूबर 2026। आपदा कभी भी और कहीं भी आ सकती है। ऐसे में समय पर सही निर्णय लेना, सुरक्षा के उपायों की जानकारी होना और घबराने के बजाय सूझबूझ से काम करना किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर पीएम एक्सीलेंस महाविद्यालय, सागर में आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मेरा युवा भारत (MY Bharat), सागर के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विभिन्न आपदाओं से बचाव के व्यावहारिक तरीके बताए गए। लाइव डेमो के माध्यम से उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों में स्वयं को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
लाइव डेमो से समझाए आग और गैस रिसाव से बचाव के तरीके
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता चीफ फायर ट्रेनर ए.के. सिंह ने विद्यार्थियों को आग लगने, एलपीजी गैस के रिसाव, बाढ़ और भूकंप जैसी परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से अग्निशमन उपकरणों के उपयोग और आग लगने की स्थिति में सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के तरीकों को समझाया।
उन्होंने बताया कि एलपीजी गैस का रिसाव होने पर छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित तरीके से बाहर निकलना, आग या चिंगारी पैदा करने वाली गतिविधियों से बचना और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सहायता लेना आवश्यक है।
इसी प्रकार, आग लगने पर सुरक्षित निकास का उपयोग करने, भूकंप के दौरान स्वयं को सुरक्षित रखने और बाढ़ की स्थिति में पानी के तेज बहाव से दूर रहने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया गया।
आपदा के समय सतर्कता और सही निर्णय सबसे जरूरी
ए.के. सिंह ने कहा कि आपदा के समय थोड़ी-सी सतर्कता और सही जानकारी बड़ी दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार साबित हो सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि राहत एवं बचाव कार्य के दौरान दूसरों की सहायता करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को आपदा प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों की मदद करने, सुरक्षित स्थान पर पहुंचने तथा जरूरत के अनुसार संबंधित आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करने के बारे में भी जागरूक किया गया।
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई। उन्हें इन नंबरों को याद रखने और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों तक भी यह जानकारी पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रमुख हेल्पलाइन नंबर इस प्रकार हैं—
- 112 — एकीकृत आपातकालीन सहायता
- 101 — अग्निशमन सेवा
- 108 — एम्बुलेंस एवं चिकित्सा आपातकालीन सेवा
- 102 — एम्बुलेंस सेवा
- 1098 — चाइल्ड हेल्पलाइन
- 181 — महिला हेल्पलाइन
- 14416 — टेली-मानस मानसिक स्वास्थ्य सहायता
विद्यार्थियों को बताया गया कि आपातकालीन नंबरों की जानकारी होने से जरूरत के समय संबंधित सहायता तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अलग-अलग सेवाओं की उपलब्धता और कार्यक्षेत्र के अनुसार सहायता की प्रक्रिया भिन्न हो सकती है।
डॉ. आर.सी. प्रजापति बोले—हर व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए आपदा प्रबंधन की जानकारी
कार्यक्रम में डॉ. आर.सी. प्रजापति ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है। यदि लोगों को समय रहते बचाव के उपायों और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी मिल जाए, तो वे स्वयं, अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के साथ-साथ आमजन में भी सुरक्षा संबंधी समझ विकसित करने के लिए उपयोगी बताया।
विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण पर दिया जोर
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सत्य सोनी ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना अत्यंत आवश्यक है। केवल जानकारी प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में उसका सही तरीके से उपयोग करना भी आना चाहिए।
उन्होंने कार्यक्रम में शामिल वक्ताओं, आयोजकों, महाविद्यालय के स्टाफ और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाविद्यालय के स्टाफ और छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा
इस अवसर पर डॉ. साहिवा नासिर, डॉ. साकेत जैन, डॉ. आर.सी. प्रजापति, डॉ. सत्य सोनी सहित महाविद्यालय का स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने लाइव डेमो के माध्यम से अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
युवाओं को जिम्मेदार और जागरूक बनाना कार्यक्रम का उद्देश्य
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रति जागरूक करना, उनमें सुरक्षा संबंधी व्यवहार विकसित करना और आपातकालीन परिस्थितियों में जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने के लिए प्रेरित करना रहा।
इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार करने में मददगार हो सकते हैं। आपदा के समय सही जानकारी, समय पर सहायता और सुरक्षा नियमों का पालन न केवल स्वयं की रक्षा करने में, बल्कि दूसरों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
लोकेशन — सागर, मध्यप्रदेश
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