विश्वविद्यालय: स्वच्छ परिसर, स्वस्थ जीवन और सतत भविष्य की ओर एक सार्थक पहल

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सागर। स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, स्वच्छ पर्यावरण और जिम्मेदार नागरिकता की पहचान है। इसी भावना को साकार करते हुए डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने राष्ट्रीय अभियान “स्वच्छता ही सेवा” एवं “स्पेशल कैंपेन 6.0” के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का उत्साहपूर्वक आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करना तथा परिसर में स्वच्छता एवं सतत जीवनशैली की संस्कृति को सुदृढ़ करना था।
इस कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. श्वेता यादव, तथा विभाग के संकाय सदस्य डॉ. सी. पी. उपाध्याय एवं डॉ. दीक्षी अंगिरा की सक्रिय सहभागिता रही। उनके साथ विभाग के कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

स्वच्छता अभियानः स्वच्छ परिसर की ओर सामूहिक कदम

अभियान के अंतर्गत विभाग द्वारा स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया, जिसमें संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित परिसर के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने का संदेश दिया।
इस गतिविधि ने न केवल स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ठ के उचित प्रबंधन और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में भी सार्थक प्रयास किया।

नारा लेखन प्रतियोगिताः शब्दों से स्वच्छता का संदेश

स्वच्छता के संदेश को रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा नारा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के साथ विभाग के कर्मचारियों श्री नारायण सिंह, श्री वास्कल एवं श्री शुभम ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
प्रतिभागियों ने अपने रचनात्मक विचारों और प्रभावशाली नारों के माध्यम से स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक उत्तरदायित्व के महत्व को अभिव्यक्त किया। विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की संयुक्त भागीदारी ने इस गतिविधि को समावेशी और प्रेरणादायक स्वरूप प्रदान किया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि स्वच्छता का संकल्प किसी एक व्यक्ति या वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

सामूहिक सहभागिता से सतत भविष्य की ओर

‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के अंतर्गत आयोजित इन गतिविधियों ने स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने और सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने इस पहल के माध्यम से स्वस्थ, स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिसर के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि स्वच्छता केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर अपनाया जाने वाला संस्कार है। प्रत्येक व्यक्ति का छोटा-सा प्रयास सामूहिक रूप से बड़े परिवर्तन का आधार बन सकता है।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, भविष्य में भी पर्यावरणीय जागरूकता, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास से जुड़ी पहलों के माध्यम से एक स्वच्छ, स्वस्थ एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

“स्वच्छता अपनाएँ, पर्यावरण बचाएँ-स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत बनाएँ।”

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