मुकेश किसान सेवा केंद्र, पटेल कंस्ट्रक्शन और ऑनलाइन दुकान संचालक के खाते में राशि डालने का दावा; रोजगार सहायक लक्ष्मण प्रसाद लोधी से संपर्क नहीं होने पर पक्ष जानने का प्रयास अधूरा
देवरी, सागर। सागर जिले की देवरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जनपद पंचायत देवरी की ग्राम पंचायत भर्रई में फील्ड पॉइंट निर्माण कार्यों के नाम पर कथित भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिन कार्यों के लिए शासकीय राशि आहरित की गई, उनमें से कुछ स्थलों पर मौके पर निर्माण कार्य दिखाई नहीं दिया। वहीं, कुछ दुकानों और फर्मों के नाम पर भी हजारों से लेकर लाखों रुपये तक भुगतान किए जाने का दावा किया जा रहा है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
छिगोड़ा में फील्ड पॉइंट निर्माण पर सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत भर्रई के ग्राम छिगोड़ा में तुलसी के खेत के पास फील्ड पॉइंट निर्माण के नाम पर राशि निकाले जाने का आरोप है। संबंधित स्थल का निरीक्षण करने पर वहां नया फील्ड पॉइंट निर्माण दिखाई नहीं देने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के हवाले से बताया गया कि वहां मौजूद तालाब करीब 15 से 20 वर्ष पुराना है और हाल के दिनों में कोई नया निर्माण नहीं हुआ।
इसी तरह कुंजी के खेत के पास प्रस्तावित फील्ड पॉइंट निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। संबंधित कार्यों की स्वीकृत राशि, भुगतान और वास्तविक निर्माण की स्थिति का पता तकनीकी दस्तावेजों तथा स्थल के भौतिक सत्यापन से लगाया जा सकता है।
दुकानों और फर्मों के नाम पर भुगतान का दावा
मामले में महाराजपुर स्थित मुकेश किसान सेवा केंद्र के नाम पर करीब एक लाख रुपये का भुगतान किए जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा कुंजी के खेत के पास बताए जा रहे निर्माण कार्य के संबंध में लगभग दो लाख रुपये की राशि का उल्लेख किया जा रहा है। पटेल कंस्ट्रक्शन के नाम पर भी लाखों रुपये के भुगतान का आरोप है।
हालांकि, इन भुगतानों की वास्तविकता, बिलों की वैधता और संबंधित फर्मों या दुकानों द्वारा सामग्री उपलब्ध कराने अथवा निर्माण कार्य करने की पुष्टि उपलब्ध भुगतान अभिलेखों और बैंक विवरणों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
ऑनलाइन दुकान संचालक के खाते में 50 हजार रुपये डालने का आरोप
मामले में महाराजपुर में ऑनलाइन कंप्यूटर दुकान संचालित करने वाले ठाकुरदास कुर्मी का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उनके खाते में करीब 50 हजार रुपये जमा किए गए थे।
बताया गया है कि इस संबंध में बातचीत के दौरान दुकान संचालक ने कथित तौर पर कहा कि उनके खाते में पैसे डाले जाते थे और बाद में रोजगार सहायक लक्ष्मण प्रसाद लोधी उन पैसों को वापस ले लेते थे। उनके कथित बयान के अनुसार, उन्हें इसके बदले कोई कमीशन नहीं मिलता था।
इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। बैंक लेनदेन, भुगतान के उद्देश्य और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
रोजगार सहायक की भूमिका पर सवाल, स्पष्टीकरण लेने का प्रयास
ग्राम पंचायत भर्रई में रोजगार सहायक लक्ष्मण प्रसाद लोधी के पास पंचायत सचिव का प्रभार भी होने की बात कही जा रही है। उनके कार्यकाल में कथित भुगतान और निर्माण कार्यों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी निर्धारित करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इस मामले में रोजगार सहायक लक्ष्मण प्रसाद लोधी का पक्ष जानने के लिए फोन पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया। बताया गया कि पिछले दो दिनों से उनसे संपर्क कर मामले में स्पष्टीकरण लेने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन उनका फोन बंद आने के कारण संपर्क नहीं हो सका। संपर्क स्थापित नहीं होने के चलते उनका पक्ष फिलहाल प्राप्त नहीं हो पाया है। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
किन दस्तावेजों की जांच से सामने आएगी वास्तविकता?
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए निम्न बिंदुओं का सत्यापन आवश्यक है—
- फील्ड पॉइंट निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति।
- माप पुस्तिका, मूल्यांकन विवरण और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र।
- बिल-वाउचर, भुगतान आदेश तथा बैंक लेनदेन का रिकॉर्ड।
- मुकेश किसान सेवा केंद्र और पटेल कंस्ट्रक्शन के नाम पर किए गए भुगतानों का विवरण।
- ऑनलाइन दुकान संचालक के खाते में जमा और कथित तौर पर वापस ली गई राशि का सत्यापन।
- संबंधित स्थलों का तकनीकी अधिकारियों से भौतिक निरीक्षण।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से मांग की जा रही है कि ग्राम पंचायत भर्रई में फील्ड पॉइंट निर्माण कार्यों और उनसे संबंधित भुगतानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों के बिलों का सत्यापन हो और निर्माण स्थलों का भौतिक निरीक्षण कराया जाए।
यदि जांच में शासकीय राशि के दुरुपयोग, गलत भुगतान या फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। जांच रिपोर्ट, संबंधित अभिलेखों और जिम्मेदार अधिकारियों के पक्ष से ही यह स्पष्ट होगा कि भुगतान नियमानुसार हुए या किसी प्रकार की अनियमितता हुई।







