मन की स्वच्छता से शुरू होकर आसपास की स्वच्छता तक, विद्यार्थियों ने दिया नैतिक ज़िम्मेदारी का संदेश
सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के ललित कला एवं प्रदर्शनकारी कला विभाग तथा सांस्कृतिक परिषद् के विद्यार्थियों ने “स्वच्छता ही सेवा (SHS 6.0): स्वच्छ भारत, विकसित भारत” अभियान के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक “दाग़ अच्छे नहीं हैं” का प्रभावशाली मंचन किया। विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित इन प्रस्तुतियों की शुरुआत सुबह 10:30 बजे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स (टपरा) स्थित सेंटर पॉइंट से हुई, जहाँ बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शिक्षक दर्शक के रूप में उपस्थित रहे।
नाटक में विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी के विचारों को आधार बनाते हुए यह संदेश दिया कि स्वच्छता की शुरुआत मन की स्वच्छता से होती है। जब तक हमारे विचार और व्यवहार स्वच्छ नहीं होंगे, तब तक बाहरी स्वच्छता भी स्थायी नहीं हो सकती। कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद और गीतों के माध्यम से यह भी रेखांकित किया कि अपने घर, मोहल्ले, कार्यस्थल और परिसर को स्वच्छ रखना हर नागरिक की नैतिक ज़िम्मेदारी है, जिसे किसी और पर नहीं छोड़ा जा सकता।
नाटक के माध्यम से बताया गया कि स्वच्छता का पाठ हम सभी ने अपनी पहली पाठशाला से पढ़ा और समझा है, लेकिन हमने उसे केवल पाठ्य-पुस्तकों तक ही सीमित रखा है। आज भी हम स्वच्छता को सिर्फ़ दिवसों और पखवाड़ों तक ही अपनाते हैं, जो उचित नहीं है। स्वच्छता कोई एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि हमारी दिनचर्या, आदत और जीवनशैली का स्थायी हिस्सा होनी चाहिए।
नाटक में स्वच्छता मित्रों के सम्मान पर भी विशेष बल दिया गया। संदेश दिया गया कि सफ़ाईकर्मी हमारे समाज की रीढ़ हैं और उनके अथक परिश्रम के बिना स्वच्छ जीवन की कल्पना करना कठिन है। इसलिए हमें उनके कार्य का सदैव सम्मान करना चाहिए और उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा देना चाहिए। दर्शकों ने नाटक की सराहना की और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।
नुक्कड़ नाटक का निर्देशन डॉ. नीरज उपाध्याय, श्री आशुतोष सिंघई, श्री अमित कुमार गुप्ता एवं श्री भास्कर सिंह ठाकुर ने किया। संपूर्ण आयोजन डॉ. राकेश सोनी के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ डॉ. बलवन्त सिंह भदौरिया, डॉ. अल्ताफ मुलानी, डॉ. संजय शर्मा, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल, डॉ. सुप्रभा दास तथा श्री आकाश मालवीय सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों के इस रचनात्मक प्रयास की प्रशंसा की और कहा कि कला के माध्यम से दिया गया संदेश सीधे लोगों के मन तक पहुँचता है।







