प्रवीण सांस्कृतिक मंच, पटना के कलाकार पांच नाटकों का करेंगे मंचन; विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन आयोजित होगी नाट्य कार्यशाला
सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर की सांस्कृतिक परिषद एवं प्रवीण सांस्कृतिक मंच, पटना (बिहार) के संयुक्त तत्वावधान में 6 से 10 दिसंबर 2026 तक पांच दिवसीय नाट्योत्सव एवं नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रवीण सांस्कृतिक मंच, पटना के कलाकार विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती प्रेक्षागृह में पांच नाटकों का मंचन करेंगे। साथ ही, रंगमंच में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को अभिनय, निर्देशन एवं रंगमंच की विभिन्न बारीकियों से परिचित कराने के लिए प्रतिदिन कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
नाट्योत्सव के पोस्टर का विमोचन विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रो. नागेश दुबे, सांस्कृतिक परिषद के समन्वयक डॉ. राकेश सोनी, डॉ. नीरज उपाध्याय, अल्ताफ मुलाणी तथा प्रवीण सांस्कृतिक मंच, पटना से पधारे संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित श्री हरिशंकर रवि एवं श्री राहुल कुमार की उपस्थिति में किया गया।
नाट्योत्सव के संयोजक डॉ. नीरज उपाध्याय ने बताया कि प्रवीण सांस्कृतिक मंच के कलाकार श्री बिज्येन्द्र टांक के निर्देशन में पांच अलग-अलग नाटकों की प्रस्तुतियां देंगे। महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की विविध रंगमंचीय परंपराओं, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों और सामाजिक सरोकारों से परिचित कराना है।
उन्होंने बताया कि नाट्योत्सव के पहले दिन 6 दिसंबर को जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘गुंडा’, 7 दिसंबर को शिवमूर्ति की कहानी ‘कुच्ची का कानून, 8 दिसंबर को ‘नागरदौला, 9 दिसंबर को भिखारी ठाकुर की प्रसिद्ध रचना ‘गबरघिचोर’ तथा 10 दिसंबर को ‘वैजयंती’ का मंचन किया जाएगा।
नाट्य प्रस्तुतियों के साथ आयोजित होने वाली कार्यशाला में विश्वविद्यालय के रंगमंच विभाग तथा रंगमंच में रुचि रखने वाले अन्य विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को अभिनय, नाट्य प्रस्तुति और रंगमंच की व्यावहारिक बारीकियों को समझने का अवसर मिलेगा।
सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. राकेश सोनी ने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल नाटक देखने का अवसर नहीं, बल्कि रंगमंच की विविध शैलियों, क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक प्रश्नों को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी होगा। बिहार की रंगमंचीय परंपरा और वहां के कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित होंगे तथा नाटकों की विषयवस्तु के जरिए समाज, संस्कृति और जीवन से जुड़े सवालों को समझ सकेंगे।







