डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर के बीच शोध, प्रशिक्षण एवं परामर्श सेवाओं के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर

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(बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रचलित बीमारियों पर होगा आधुनिक शोध, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं चिकित्सा विशेषज्ञों को मिलेगा उन्नत प्रशिक्षण का अवसर)

सागर। बुंदेलखंड क्षेत्र में चिकित्सा अनुसंधान, उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर के बीच शुक्रवार को शोध, प्रशिक्षण एवं परामर्श सेवाओं के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता, आधुनिक शोध सुविधाओं एवं उपलब्ध संसाधनों का संयुक्त रूप से उपयोग करके बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रचलित विभिन्न बीमारियों पर उन्नत शोध करना तथा उनके निदान और उपचार की नई संभावनाओं को तलाशना है। इसके माध्यम से चिकित्सा विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, आनुवंशिकी, जीनोमिक्स, फार्मेसी एवं आणविक जीव विज्ञान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शोध को प्रोत्साहन मिलेगा।

डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में आधुनिक शोध प्रयोगशालाएं, अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण तथा आनुवंशिकी, जीनोमिक्स, फार्मेसी और आणविक जीव विज्ञान के विशेषज्ञ प्राध्यापक उपलब्ध हैं। वहीं, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज मंि अनुभवी चिकित्सकों की टीम, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं तथा विभिन्न बीमारियों से संबंधित मरीजों के नमूने और चिकित्सकीय जानकारी उपलब्ध है। दोनों संस्थानों की इन विशेषताओं को एक साथ जोड़कर प्रयोगशाला आधारित शोध और वास्तविक चिकित्सा समस्याओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इस प्रकार क्षेत्र में प्रचलित बीमारियों के कारणों, उनके आणविक एवं आनुवंशिक आधार तथा संभावित निदान के उपायों पर वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सकेगा। सभी शोध कार्य संबंधित नैतिक एवं नियामक नियमों के अनुसार किए जाएंगे।

इस अवसर पर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. पी. एस. ठाकुर ने कहा कि यह एमओयू केवल नए वैज्ञानिक ज्ञान के सृजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से क्षेत्र में प्रचलित बीमारियों के लिए नई दवाओं, उपचार पद्धतियों और बेहतर चिकित्सा विकल्पों की संभावनाओं पर भी शोध किया जा सकेगा। दोनों संस्थानों के विशेषज्ञ अपने ज्ञान और अनुभव साझा करेंगे। इससे मेडिकल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और चिकित्सकों को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उन्नत शोध एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में उपलब्ध आधुनिक इंटीग्रेटिव जीनोमिक्स सुविधाएं बीमारियों के आनुवंशिक एवं आणविक स्तर पर अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी तथा भविष्य में आधुनिक निदान और उपचार पद्धतियों के विकास में सहायक हो सकती हैं।

विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. नागेश दुबे ने इस एमओयू को बुंदेलखंड क्षेत्र में चिकित्सा अनुसंधान एवं वैज्ञानिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि दो प्रमुख शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों के एक साथ आने से क्षेत्र में शोध और नवाचार का नया वातावरण तैयार होगा। उन्होंने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में स्थापित आधुनिक शोध सुविधा एमडीआरयू (MDRU) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सुविधा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों के संयुक्त शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस. पी. उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान समय में शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय अत्यंत आवश्यक है। दोनों संस्थानों के प्राध्यापकों और विशेषज्ञों को मिलकर एक मजबूत शोध वातावरण तैयार करना चाहिए। इस सहयोग से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा तथा उनमें शोध संबंधी कौशल और तकनीकी दक्षता का विकास होगा। इससे न केवल विद्यार्थियों और शोधार्थियों को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में चिकित्सा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान को भी नई दिशा मिलेगी।

एमओयू के विश्वविद्यालय समन्वयक प्रो. यू. के. पाटिल, विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष एवं अनुसंधान एवं विकास निदेशक प्रो. श्वेता यादव तथा बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की एमडीआरयू समन्वयक प्रो. श्वेता भटनागर एवं डॉ. शशि मार्को, सदस्य सचिव, इं‍स्टीौटयूशनल एथीकल कमेटी ने इस सहयोग को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाएं, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां तथा विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, भविष्य में दोनों संस्थानों के लिए उपयोगी नई शोध एवं प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाएगा।

इस एमओयू का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों को आधुनिक चिकित्सा एवं जैव चिकित्सा अनुसंधान से जोड़ना है। इसके अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी के विद्यार्थियों, मेडिकल इंटर्न, शोधार्थियों और प्राध्यापकों को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं तथा संयुक्त शोध परियोजनाओं में भाग लेने के अवसर मिलेंगे। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक आणविक निदान, जीनोमिक्स, जैव सूचना विज्ञान और अन्य उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रचलित विभिन्न बीमारियों के अध्ययन के लिए यह सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों संस्थानों के विशेषज्ञ मरीजों से प्राप्त चिकित्सकीय जानकारी और आधुनिक आणविक एवं आनुवंशिक तकनीकों के माध्यम से बीमारियों के कारणों, उनकी प्रकृति तथा संभावित जैविक संकेतकों (बायोमार्कर्स) का अध्ययन कर सकेंगे। इससे भविष्य में बीमारियों की शीघ्र पहचान, बेहतर निदान और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार पद्धतियों के विकास के लिए नए शोध मार्ग खुल सकते हैं।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डॉ. सी. पी. उपाध्याय, डॉ. दीक्षी अंगिरा, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की डॉ. नीतू मिश्रा सहित विश्वविद्यालय एवं मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के अनेक प्राध्यापक और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

यह एमओयू बुंदेलखंड क्षेत्र में चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक जैविक अनुसंधान के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों संस्थानों की संयुक्त विशेषज्ञता, शोध सुविधाओं और संसाधनों का उपयोग क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने तथा चिकित्सा अनुसंधान में नई उपलब्धियां हासिल करने में सहायक होगा। इससे भविष्य में बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों को भी आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के लाभ प्राप्त होने की उम्मीद है।

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