विश्वविद्यालय : आज की सशक्त स्त्री को पुरुषों के अप्रूवल की जरूरत नहीं है – प्रो. रश्मि सिंह

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सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के भाषा अध्ययनशाला द्वारा “लिटरेरी फ्यूचर्स नाउ” के तहत “संस्कृत साहित्य में अभिनव विमर्श” विषय पर तृतीय व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्तव्य देते हुए संस्कृत विभाग के डॉ. रामहेत गौतम ने कहा कि संस्कृत साहित्य भारतीय ज्ञान परम्परा का साहित्य है जिसमें हाशिए के समाज के दलित, स्त्री, आदिवासी और किन्नरों के ऊपर व्यापक रूप से लिखा गया है। उन्होंने संस्कृत के उदाहरणों के साथ अपनी बात रखी।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रो. रश्मि सिंह ने सिनेमा और साहित्य से उदाहरण देते हुए कहा कि आज की स्त्री को किसी पुरुष के अप्रूवल की जरूरत नहीं है। आज की स्त्री सशक्त है। उसने अपनी मेहनत से अपनी पहचान निर्मित की है।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रो. राजेंद्र यादव ने दिया। विषय प्रस्तावना कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हिमांशु कबीर ने प्रस्तुत की । डॉ. अरविंद कुमार ने संचालन किया और डॉ. अभिज्ञान द्विवेदी ने सबका आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में बड़ी मात्रा में भाषा अध्ययनशाला के शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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