केंद्रीय जेल सागर में विपश्यना शिविर का समापन, 28 बंदियों को मिले प्रमाण पत्र

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ध्यान और आत्मचिंतन से सकारात्मक बदलाव की पहल, मानसिक शांति एवं आत्मानुशासन का दिया गया संदेश

सागर। केंद्रीय जेल सागर में बंदियों के मानसिक, आध्यात्मिक और नैतिक विकास की दिशा में आयोजित 10 दिवसीय विपश्यना ध्यान शिविर का गुरुवार, 29 अक्टूबर को सफलतापूर्वक समापन हुआ। जेल मुख्यालय भोपाल के वार्षिक आध्यात्मिक कैलेंडर के तहत 18 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए इस शिविर में कुल 30 बंदियों ने सहभागिता की, जिनमें से 28 बंदियों ने सफलतापूर्वक शिविर पूरा किया।

शिविर में गुरुजी उमेश देशपांडे का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ। उनके निर्देशन में प्रतिभागी बंदियों ने विपश्यना ध्यान का अभ्यास किया और आत्मचिंतन, मानसिक शांति, धैर्य, आत्मानुशासन तथा सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण के महत्व को समझा।

आत्मपरिवर्तन और सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के व्यक्तित्व विकास, व्यवहार में सकारात्मक बदलाव और उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न रचनात्मक एवं सुधारात्मक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। विपश्यना शिविर भी इसी प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ध्यान के माध्यम से बंदियों को अपने विचारों और व्यवहार का आत्मनिरीक्षण करने तथा संयम, धैर्य और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

28 बंदियों को वितरित किए प्रमाण पत्र

शिविर के समापन अवसर पर सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 28 बंदियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। जेल प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों को भविष्य में भी सकारात्मक गतिविधियों से जुड़े रहने और जीवन में अच्छे बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित किया।

यह शिविर इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि आत्मचिंतन, ध्यान और अनुशासन के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।

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