रात्रि में अधीक्षकों की मौजूदगी, भोजन, बजट और सुविधाओं को लेकर शिकायतें; एक अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावासों का प्रभार देने पर भी सवाल
देवरी/सागर। देवरी विधानसभा क्षेत्र के गौरझामर, केसली, सहजपुर और महाराजपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में संचालित शासकीय बालक एवं कन्या छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। शिकायतों में छात्रावासों में अधीक्षकों की रात्रिकालीन मौजूदगी, विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन की गुणवत्ता, सामग्री एवं बजट के उपयोग तथा विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई है।
बताया जा रहा है कि गौरझामर में एक बालक और एक कन्या छात्रावास, केसली में करीब तीन बालक और तीन कन्या छात्रावास, सहजपुर में एक बालक छात्रावास तथा महाराजपुर में तीन छात्रावास संचालित हैं। इन छात्रावासों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहकर अध्ययन करते हैं। ऐसे में वहां विद्यार्थियों की सुरक्षा और दैनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
रात्रि में अधीक्षकों की मौजूदगी पर सवाल
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ छात्रावासों में अधीक्षक रात्रि के समय परिसर में मौजूद नहीं रहते और घर से ही व्यवस्था संचालित किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता विभागीय स्तर पर औचक रात्रिकालीन निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए यह जानना जरूरी है कि रात्रि के समय जिम्मेदार कर्मचारी या अधीक्षक मौके पर मौजूद रहते हैं या नहीं। विशेषकर ऐसे छात्रावास जहां नाबालिग विद्यार्थी रहते हैं, वहां किसी भी आपात स्थिति में तत्काल जिम्मेदारी संभालने की व्यवस्था होना आवश्यक है।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि सामान्य कार्यालयीन समय में निरीक्षण के बजाय अचानक रात्रिकालीन निरीक्षण कराया जाए, ताकि मौके की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
एक अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावासों का प्रभार
छात्रावासों की व्यवस्थाओं के बीच एक अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावासों का प्रभार दिए जाने का मुद्दा भी सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि एक अधीक्षक के पास कई छात्रावासों की जिम्मेदारी है तो प्रत्येक स्थान पर पर्याप्त समय देना और नियमित निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि जिन अधीक्षकों के पास पहले से एक छात्रावास की जिम्मेदारी है, उन्हें अतिरिक्त छात्रावास का प्रभार किन प्रशासनिक परिस्थितियों में दिया गया? क्या अतिरिक्त प्रभार देने से पहले संबंधित छात्रावासों की व्यवस्थाओं और अधीक्षक की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई?
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पिछले एक वर्ष में जारी किए गए अतिरिक्त प्रभार संबंधी सभी आदेशों की समीक्षा की जाए और यह सार्वजनिक किया जाए कि किस अधीक्षक को कितने छात्रावासों का प्रभार सौंपा गया है।
अतिरिक्त प्रभार देने का आधार क्या?
शिकायतकर्ताओं का मुख्य सवाल यह है कि अतिरिक्त प्रभार देने के लिए विभाग द्वारा कौन-से प्रशासनिक मानदंड अपनाए जाते हैं। यदि किसी अधीक्षक के संबंध में उपस्थिति, भोजन, सामग्री, छात्रावास संचालन अथवा अन्य व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें पहले से अधिकारियों के संज्ञान में थीं, तो अतिरिक्त प्रभार देने से पहले उनकी समीक्षा की गई या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
कुछ शिकायतकर्ताओं ने अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों के बीच कथित मिलीभगत की आशंका भी व्यक्त की है। हालांकि इस तरह के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विभागीय जांच जरूरी है।
निरीक्षण पंजिका और कार्रवाई की भी हो जांच
शिकायतों के बाद अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों की मांग है कि देवरी, केसली, गौरझामर, महाराजपुर और सहजपुर क्षेत्र के छात्रावासों में पिछले एक वर्ष के दौरान किए गए निरीक्षणों की जानकारी सामने लाई जाए।
निरीक्षण पंजिका में दर्ज कमियों, संबंधित अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों तथा उन निर्देशों के पालन की स्थिति की जांच की जाए। यदि किसी निरीक्षण में अनियमितता या कमी दर्ज की गई थी तो उस पर बाद में क्या कार्रवाई हुई, इसका भी रिकॉर्ड देखा जाए।
बजट, बिल-वाउचर और स्टॉक रजिस्टर का हो मिलान
छात्रावासों में विद्यार्थियों के भोजन, सामग्री, रखरखाव और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए शासन द्वारा राशि उपलब्ध कराई जाती है। शिकायतों में इन मदों में अनियमितता के आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित छात्रावासों के बजट आवंटन और खर्च का रिकॉर्ड जांचने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, भोजन संबंधी रिकॉर्ड तथा खरीदी गई सामग्री की मौके पर उपलब्धता का मिलान कराया जाना चाहिए।
यदि दस्तावेजों और मौके पर उपलब्ध सामग्री में अंतर मिलता है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति सही पाई जाती है तो शिकायतों की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
भोजन और मूलभूत सुविधाओं की जांच जरूरी
छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार भोजन, स्वच्छ पेयजल, बिजली, साफ-सफाई, बिस्तर, अध्ययन की सुविधा और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है।
शिकायतों के बीच विशेष रूप से भोजन की गुणवत्ता और निर्धारित मीनू के पालन की जांच की मांग की जा रही है। इसके अलावा पेयजल की स्थिति, साफ-सफाई, विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सामग्री तथा छात्रावास भवन की मूलभूत सुविधाओं का भी मौके पर निरीक्षण किए जाने की मांग है।
रात्रिकालीन औचक निरीक्षण से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि विभाग वास्तव में व्यवस्थाओं की स्थिति जानना चाहता है तो जिला स्तर की टीम द्वारा बिना पूर्व सूचना के रात्रिकालीन निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान अधीक्षक की उपस्थिति, छात्रावास में मौजूद विद्यार्थियों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं की जांच के साथ-साथ संबंधित दस्तावेज भी देखे जाएं। अचानक निरीक्षण होने पर कागजी रिकॉर्ड और वास्तविक व्यवस्था के बीच किसी अंतर की स्थिति भी सामने आ सकती है।
विद्यार्थियों की सुरक्षा सबसे अहम
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा का है। यदि किसी छात्रावास में रात के समय जिम्मेदार अधीक्षक या निर्धारित कर्मचारी मौजूद नहीं रहता है, तो किसी आपात स्थिति में विद्यार्थियों की तत्काल देखरेख कौन करेगा, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी तरह यदि किसी अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावासों का प्रभार दिया गया है तो यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि सभी छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और दैनिक व्यवस्थाओं की पर्याप्त निगरानी हो रही है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि देवरी विधानसभा क्षेत्र के संबंधित छात्रावासों की जिला स्तर की टीम से औचक और रात्रिकालीन जांच कराई जाए। जांच में अधीक्षक की उपस्थिति, विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, भोजन व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा, स्टॉक रजिस्टर, बजट, बिल-वाउचर और अन्य अभिलेखों का परीक्षण किया जाए।
साथ ही अतिरिक्त प्रभार से संबंधित आदेशों और उनके प्रशासनिक आधार की भी समीक्षा की जाए।
अब निगाहें विभागीय अधिकारियों पर हैं। यदि जांच में शासन के नियमों का उल्लंघन, वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि शिकायतों की पुष्टि नहीं होती है तो विभागीय जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थी शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी हैं। इसलिए शिकायतों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करना महत्वपूर्ण होगा।








