सागर। युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि नवरात्रि का पर्व हमें आत्मानुशासन, साधना, आत्मविकास और नारी शक्ति के सम्मान की प्रेरणा देता है। भारतीय संस्कृति में शिव और शक्ति को एक-दूसरे का पूरक माना गया है, जहां शिव स्रोत हैं तो शक्ति गति का प्रतीक है। नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन कर जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि समाज में मातृशक्ति के सम्मान को व्यवहार में उतारना आवश्यक है। नवरात्रि में कन्या पूजन करने के साथ कन्या सुरक्षा का संकल्प भी लेना चाहिए, ताकि बेटियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर वातावरण मिल सके।
नवरात्रि के पावन पर्व पर 11 अक्टूबर को बाघराज वार्ड में सोमनाथपुरम के पास पार्षद राजकुमार पटेल के आयोजन में नवरात्रि भजन महोत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भजन गायक मनीष अग्रवाल ने प्रसिद्ध भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्तिमय वातावरण में भावविभोर किया। इस दौरान अविराज सिंह ने महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ भी किया ।
अविराज सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए नवरात्रि का विशेष महत्व है। यदि युवा इस अवधि का उपयोग आत्मानुशासन, साधना और आत्मविकास के लिए करें, तो उनका जीवन अधिक संतुलित, उद्देश्यपूर्ण और सकारात्मक बन सकता है। मां दुर्गा की आराधना मनुष्य को साहस, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि मां शैलपुत्री की आराधना प्रकृति और समस्त जीव-जंतुओं के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश भी देती है। नवरात्रि का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर की दुर्बलताओं को दूर करना, सद्गुणों को विकसित करना और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम द्वारा मां दुर्गा की आराधना और शक्ति प्राप्ति का प्रसंग भारतीय धार्मिक परंपरा में आस्था, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रकार महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण अंग है। इसके सस्वर पाठ से धार्मिक वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। श्रद्धालु इस स्तोत्र को साहस, आत्मविश्वास, मानसिक शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ ही उनमें सकारात्मक विचारों, परस्पर सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी होना चाहिए।
अविराज सिंह ने कहा कि मातृशक्ति इसलिए वंदनीय है, क्योंकि वह परिवार और समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नारी के सम्मान की सार्थकता तभी है, जब उसे पूजा और परंपराओं तक सीमित न रखकर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर, सुरक्षा और सम्मान दिया जाए। नवरात्रि का पर्व हमें यह संदेश देता है कि शक्ति की उपासना के साथ उसके वास्तविक स्वरूप को भी समझें और महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाएं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ मूल्यों को आत्मसात करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अपनी भूमिका निभाएं तथा धार्मिक पर्वों को सेवा, सद्भाव और जनकल्याण से जोड़ें।
आयोजन के अंतर्गत राजकुमार पटेल द्वारा महिलाओं को 4000 साड़ियों का वितरण किया गया। धार्मिक आयोजन के साथ महिलाओं को साड़ी वितरण की पहल ने कार्यक्रम को सामाजिक सेवा से भी जोड़ा। कार्यक्रम में महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी, सुशील तिवारी, समिति अध्यक्ष मोतीलाल दादा कुशवाहा, लक्ष्मण सिंह, हरिश्चंद्र पटेल, राजकुमार पटेल, श्रीमती कंचन सोमेश जड़िया, रूबी पटेल, शैलेश जैन, लक्ष्मण पटेल, रमेश पटेल, सीताराम पटेल, देवी पटेल, मुन्ना पटेल, नंदराम पटेल, नारायण पटेल, संतोष रोहित, कमलेश जाटव और शुभम घोषी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।







