निरीक्षण के बाद भी अस्पताल संचालित होने का आरोप, बीएमओ पूजा परमार की कार्रवाई पर उठे सवाल
देवरी/गौरझामर। सागर जिले की देवरी तहसील के गौरझामर में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। मध्य प्रदेश शासन, सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल और जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के निर्देशों के बावजूद कथित अवैध अस्पतालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप सामने आए हैं।
गौरझामर में डॉ. अश्वनी मजूमदार और डॉ. टी.के. विश्वास द्वारा अस्पताल संचालित कर मरीजों का इलाज किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि दोनों डॉक्टरों की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय योग्यताओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में उनकी डिग्री, पंजीयन और इलाज करने की वैधानिक पात्रता की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि ग्रामीण मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
निरीक्षण के बाद जारी हुआ सात दिन का नोटिस
मामले को लेकर पत्रकारों द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच और निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि देवरी की ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. पूजा परमार ने गौरझामर स्थित संबंधित अस्पतालों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों डॉक्टर अनुपस्थित पाए जाने की बात कहते हुए सात दिन का नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी गई।
हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम के निरीक्षण के लगभग आधे घंटे बाद ही दोनों अस्पताल दोबारा खोल दिए गए और वहां मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यदि ऐसा हुआ है, तो यह स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
डॉक्टरों के दावे और बीएमओ के बयान में विरोधाभास?
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। पत्रकारों के अनुसार, संबंधित डॉक्टरों ने बातचीत के दौरान कथित तौर पर कहा कि उनके अस्पताल बीएमओ के आदेश पर चल रहे हैं। वहीं, बीएमओ डॉ. पूजा परमार ने स्पष्ट किया कि उनका संबंधित अस्पतालों को कोई संरक्षण नहीं है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि विभाग का इन अस्पतालों को संरक्षण नहीं है और उनकी वैधानिकता को लेकर जांच की जा रही है, तो निरीक्षण के बाद भी कथित तौर पर इलाज जारी रहने की शिकायतों पर तत्काल प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए? हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष और संबंधित दस्तावेज सामने आना भी जरूरी है।
कलेक्टर और सीएमएचओ के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं?
जानकारी के अनुसार, जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा देवरी ब्लॉक के अधिकारियों को संबंधित अस्पतालों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। शासन की मंशा है कि बिना आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता और पंजीयन के इलाज करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो, ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो।
इसके बावजूद गौरझामर में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के अस्पतालों के संचालन को लेकर शिकायतें सामने आना विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की दोबारा जांच कराते हैं या नहीं और जांच में अनियमितताएं मिलने पर क्या कार्रवाई की जाती है।
गरीब ग्रामीणों की जिंदगी से जुड़ा मामला
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अनेक लोग स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बिना वैधानिक योग्यता के इलाज किए जाने की आशंका मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग संबंधित अस्पतालों की डिग्री, चिकित्सकीय पंजीयन, उपचार संबंधी दस्तावेजों और संचालन की वैधानिकता की जांच करे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार अस्पताल बंद कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सागर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग गौरझामर के इस मामले में ठोस कार्रवाई करेंगे, या फिर निरीक्षण और नोटिस तक ही कार्रवाई सीमित रह जाएगी?







