ब्रिटानिका की तर्ज पर बनेगा ‘बुंदेलखंड विश्वकोश’, 30 खंडों में सहेजा जाएगा अंचल का गौरवशाली इतिहास

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सागर केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहयोग से तैयार होगा विश्वस्तरीय संदर्भ ग्रंथ, शीघ्र होगा एमओयू

सागर। बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध भाषा, साहित्य, लोक-संस्कृति, पुरातत्व और प्राकृतिक संपदा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। ब्रिटानिका एनसाइक्लोपीडिया की तर्ज पर ‘बुंदेलखंड विश्वकोश’ तैयार किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कुल 30 खंडों में बुंदेलखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को शोधपरक एवं प्रामाणिक रूप में संकलित किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण पहल को गति देने के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में विशेष परिसंवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सरोज गुप्ता के निर्देशन में हुआ। परिसंवाद में क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्वानों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने सहभागिता करते हुए बुंदेलखंड की विरासत को व्यवस्थित रूप से संरक्षित करने पर विचार-विमर्श किया।

30 खंडों में समेटी जाएगी बुंदेलखंड की विरासत

परिसंवाद में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बुंदेलखंड विश्वकोश को व्यापक, व्यवस्थित और शोध आधारित संदर्भ ग्रंथ के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके 30 खंडों में क्षेत्र की भाषा, भौगोलिक स्थिति, इतिहास, पुरातत्व, कला, संस्कृति, वन संपदा और जीव-जंतुओं की विविधता सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत सामग्री संकलित की जाएगी।

इस विश्वकोश का उद्देश्य बुंदेलखंड की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को प्रामाणिक दस्तावेज के रूप में संरक्षित करना है, ताकि विद्यार्थियों, शोधार्थियों, इतिहासकारों और भावी पीढ़ियों को इस क्षेत्र के बारे में व्यापक जानकारी उपलब्ध हो सके।

केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ होगा एमओयू

विश्वकोश के निर्माण में अकादमिक गुणवत्ता, शोध की प्रामाणिकता और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करने के लिए डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर का मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय के साथ शीघ्र ही औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किए जाने पर सहमति बनी है। विश्वविद्यालय का सहयोग इस परियोजना को उच्चस्तरीय शैक्षणिक मानकों के अनुरूप विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बुंदेलखंड की पहचान को वैश्विक मंच पर पहुंचाने का लक्ष्य

परिसंवाद की आयोजक एवं महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सरोज गुप्ता ने कहा कि बुंदेलखंड का इतिहास, ज्ञान परंपरा और लोक-संस्कृति अत्यंत समृद्ध एवं गौरवशाली है। ‘बुंदेलखंड विश्वकोश’ आने वाली पीढ़ियों और शोधार्थियों के लिए अमूल्य बौद्धिक निधि साबित होगा। इसका उद्देश्य क्षेत्र के इतिहास, भाषा, साहित्य, पुरातत्व और प्राकृतिक संपदा को एक प्रामाणिक ज्ञान-कोश में सहेजकर बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के कुलगुरु प्रो. नागेश दुबे उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता प्रो. श्रीकमल शर्मा ने की।

राष्ट्रीय सेमिनार की कार्यवृत्त पुस्तिका का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान पीएम-उषा परियोजना के सॉफ्ट कंपोनेंट के अंतर्गत महाविद्यालय में पूर्व में आयोजित ‘बुंदेलखंड पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर’ विषयक राष्ट्रीय सेमिनार की आधिकारिक कार्यवृत्त पुस्तिका का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।

इस परिसंवाद में डॉ. सुखदेव तिवारी, सचिन चतुर्वेदी, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. नीलिमा पिंपलापुरे, डॉ. आशीष द्विवेदी, डॉ. प्रतिमा खरे, सावित्री मोरे, डॉ. रश्मि यादव, डॉ. रितु विश्वकर्मा, डॉ. प्रज्ञा दुबे, डॉ. शिखा चौबे, अनुष्का राजे और रेणु सोलंकी सहित अनेक विद्वान एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।

‘बुंदेलखंड विश्वकोश’ की यह पहल क्षेत्र की ऐतिहासिक स्मृतियों, साहित्यिक उपलब्धियों और सांस्कृतिक विविधताओं को एक स्थान पर संकलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके पूर्ण होने पर बुंदेलखंड की विरासत को समझने और उस पर शोध करने के लिए एक व्यापक संदर्भ ग्रंथ उपलब्ध हो सकेगा।

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