संभाग स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में सागर का दबदबा, महिला और पुरुष दोनों वर्गों में जीता खिताब

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महिला वर्ग में गोलकीपर जिया गौड़ ने पेनल्टी पर दागा निर्णायक गोल, पुरुष वर्ग में कप्तान शबन वाल्मीकि की हैट्रिक से सागर बना चैंपियन

संघर्ष ही जीवन है, आत्मविश्वास कभी न खोएं, हार-जीत खेल का हिस्सा : डॉ. रामकुमार गोस्वामी

खेल और पढ़ाई में संतुलन तथा अनुशासन ही उज्ज्वल भविष्य की कुंजी : प्रो. सरोज गुप्ता

सागर। शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर के खेल परिसर में आयोजित संभाग स्तरीय महिला एवं पुरुष फुटबॉल प्रतियोगिता में सागर की टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दोनों वर्गों के खिताब अपने नाम कर लिए। महिला वर्ग में सागर ने दमोह को पेनल्टी शूटआउट में रोमांचक मुकाबले में हराया, वहीं पुरुष वर्ग में कप्तान शबन वाल्मीकि की शानदार हैट्रिक ने सागर को चैंपियन बना दिया। प्रतियोगिता का समापन भव्य पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ।

महिला वर्ग का फाइनल मुकाबला सागर और दमोह के बीच खेला गया। दोनों टीमों ने निर्धारित समय तक गोल करने के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन मुकाबला 0-0 की बराबरी पर समाप्त हुआ। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट से मैच का फैसला हुआ। रोमांच और दबाव से भरे इस मुकाबले में 12वीं पेनल्टी किक पर सागर की गोलकीपर जिया गौड़ ने निर्णायक गोल दागकर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। गोलकीपर जिया के इस असाधारण प्रदर्शन की पूरे टूर्नामेंट में चर्चा रही।

वहीं पुरुष वर्ग के फाइनल में सागर और दमोह की टीमों के बीच खिताबी मुकाबला हुआ। सागर के कप्तान शबन वाल्मीकि ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए लगातार तीन गोल दागकर शानदार हैट्रिक बनाई। उनके आक्रामक खेल और टीम के सामूहिक प्रयासों के दम पर सागर ने दमोह को पराजित कर पुरुष वर्ग की चैंपियन ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

प्रतियोगिता के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में उच्च शिक्षा विभाग सागर संभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. रामकुमार गोस्वामी मुख्य अतिथि तथा महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सरोज गुप्ता अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में प्रशासनिक अधिकारी डॉ. इमराना सिद्दीकी, वरिष्ठ प्राध्यापक एवं रानी अवंती बाई लोधी विश्वविद्यालय के डीन डॉ. विनय कुमार शर्मा, खेलकूद एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. सत्यनारायण लड़िया और फुटबॉल विशेषज्ञ एरिक कुजूर शामिल रहे। खेल प्रेमी वीनू शमशेर जंग बहादुर राणा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. रामकुमार गोस्वामी ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीतने वाले खिलाड़ियों को बधाई और जो खिलाड़ी जीत से थोड़ा पीछे रह गए, उन्हें अपनी कमियों को पहचानकर आगे बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिला है। आत्मविश्वास बनाए रखना जरूरी है। हार-जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन संघर्ष ही जीवन है। आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाले खिलाड़ी जीवन की हर चुनौती का सामना कर सकते हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. सरोज गुप्ता ने कहा कि खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम हैं। खेलों से अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने का साहस विकसित होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को खेल के साथ पढ़ाई में भी संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर, प्रसन्न मन और अनुशासित जीवन ही उज्ज्वल भविष्य का आधार हैं।

प्रशासनिक अधिकारी डॉ. इमराना सिद्दीकी ने कहा कि अनुशासन और आपसी तालमेल किसी भी टीम की सफलता का आधार होते हैं। वहीं डॉ. विनय कुमार शर्मा ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा और महाविद्यालय का नाम रोशन करने की भावना विकसित करती हैं। अतिथियों ने विजेता एवं उपविजेता टीमों के खिलाड़ियों को मेडल, प्रमाण पत्र और ट्रॉफियां प्रदान कर सम्मानित किया।

महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. संदीप सबलोक ने बताया कि क्रीड़ा अधिकारी डॉ. दयाराम राजपूत के निरंतर प्रयासों से महिला खिलाड़ियों को फुटबॉल जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का बेहतर मंच मिल रहा है। महिला खिलाड़ियों का उत्साह और प्रदर्शन महाविद्यालय में खेल संस्कृति के विस्तार का प्रमाण है।

इससे पूर्व प्रतियोगिता का उद्घाटन क्षेत्रीय खेल अधिकारी श्रीमती शर्मिला डाबर के मुख्य आतिथ्य और शासकीय स्वशासी कन्या महाविद्यालय की क्रीड़ा अधिकारी डॉ. मोनिका हार्डीकर की विशिष्ट उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. सरोज गुप्ता ने की।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अजय व्यास ने किया तथा आभार प्रदर्शन क्रीड़ा अधिकारी डॉ. दयाराम राजपूत ने किया। प्रतियोगिता के सफल आयोजन में निर्णायक मंडल के सदस्य शिरिल, गर्व एवं एम.एल. यादव सहित रेनू सोलंकी, डॉ. संदीप सबलोक, डॉ. अभिषेक गोयल, डॉ. जितेंद्र राजपूत, प्रज्ञा दुबे, शैलेंद्र राजपूत, आयुष बड़कुल, देव कृष्णा नामदेव, प्रमोद सेन, जीतू चौरसिया, भगवत प्रसाद, देवेंद्र, आकाश एवं महाविद्यालय परिवार का विशेष सहयोग रहा।

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