इलाज के दौरान BMC से रहस्यमय तरीके से गायब हुए दिलीप उर्फ पाउडर जिला चिकित्सालय के आईसीयू में मिला मृत

इलाज के दौरान BMC से रहस्यमय तरीके से गायब हुए दिलीप उर्फ पाउडर जिला चिकित्सालय के आईसीयू में मिला मृत

बीएमसी से रहस्यमय तरीके से गायब मरीज 11 दिन बाद जिला अस्पताल में मृत मिला, अस्पताल और पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल

सागर। शहर में स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में भर्ती एक मरीज अचानक लापता हो गया और करीब 11 दिन बाद उसका शव जिला अस्पताल में मिलने से पूरे मामले ने रहस्यमय मोड़ ले लिया है। मृतक की पहचान मोतीनगर थाना क्षेत्र निवासी दिलीप उर्फ पाउडर साहू के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, दिलीप साहू को 25 फरवरी को पीठ में दर्द की शिकायत के चलते बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था और वे करीब आठ दिन तक बीएमसी में भर्ती रहे। इस दौरान उनकी हालत सामान्य बताई जा रही थी और परिवार के सदस्य भी लगातार उनके साथ मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि 5 मार्च की सुबह जब उनके परिजन कुछ देर के लिए वार्ड से बाहर गए और वापस लौटे, तो दिलीप साहू अपने पलंग पर नहीं मिले। शुरुआत में परिजनों ने सोचा कि वे संभवतः शौचालय या अस्पताल परिसर में कहीं गए होंगे, लेकिन काफी देर तक तलाश करने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला।
इसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में हर जगह उनकी तलाश की, लेकिन कहीं भी उनका सुराग नहीं मिला। मामला गंभीर होते देख परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिनमें दिलीप साहू अपने पलंग से उठकर कुछ दूरी तक जाते हुए दिखाई दिए, लेकिन उसके बाद वे कहां गए, इसका कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका।
जब काफी खोजबीन के बाद भी दिलीप साहू का पता नहीं चला, तो परिजनों ने गोपालगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद परिवार के लोग लगातार अपने स्तर पर भी उनकी तलाश करते रहे। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार थाने से संपर्क किया और मामले में जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन पूरे समय के दौरान दिलीप साहू के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई।
इसी बीच रविवार को अचानक परिजनों को सूचना मिली कि दिलीप साहू का जिला अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया है। यह खबर सुनते ही परिवार के लोग स्तब्ध रह गए। उन्हें समझ ही नहीं आया कि बीएमसी से लापता होने के बाद दिलीप साहू जिला अस्पताल कैसे पहुंच गए।
बताया जा रहा है कि 5 मार्च की शाम किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा दिलीप साहू को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती कर लिया था। यहां उनका करीब 10 दिनों तक इलाज चलता रहा, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने के कारण बीती रात उनकी मृत्यु हो गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिला अस्पताल में इतने दिनों तक एक अज्ञात मरीज का इलाज चलता रहा, लेकिन इस बारे में संबंधित थाने को सूचना नहीं दी गई। वहीं दूसरी ओर बीएमसी से मरीज के लापता होने के बाद भी यह पता लगाने की ठोस कोशिश नहीं की गई कि वह अस्पताल परिसर से बाहर कैसे गया।
पूरी घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और पुलिस व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पहला सवाल यह है कि बीएमसी जैसे बड़े अस्पताल से एक मरीज अचानक कैसे गायब हो गया और वहां की सुरक्षा व्यवस्था उसे रोकने में क्यों नाकाम रही।
दूसरा सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। परिजनों द्वारा गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद पुलिस इस पूरे समय में दिलीप साहू तक क्यों नहीं पहुंच सकी।
तीसरा बड़ा सवाल जिला अस्पताल पर उठ रहा है, जहां कई दिनों तक एक अज्ञात मरीज का इलाज चलता रहा, लेकिन इसकी सूचना पुलिस या संबंधित विभाग को नहीं दी गई। यदि समय रहते पहचान हो जाती, तो शायद परिजनों को भी जल्द जानकारी मिल सकती थी।
इस घटना से मृतक के परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल और पुलिस ने समय पर गंभीरता दिखाई होती, तो शायद दिलीप साहू की जान बचाई जा सकती थी।
फिलहाल परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पताल प्रबंधन और पुलिस समन्वय की खामियों को उजागर करती है, जिसने आम लोगों की सुरक्षा और भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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