
भगवान श्रीकृष्ण ने कलयुग को कथा और भक्ति का युग बताया – अविराज सिंह
चौकाकला-बंगेला। युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कलयुग को कथा और भक्ति का युग बताया है। उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल भगवान की कथा श्रवण करने से मनुष्य दुखों और पापों से मुक्त हो सकता है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को आध्यात्मिक शांति, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। यह उद्गार उन्होंने चौकाकला-बंगेला में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में व्यक्त किये। इस धर्मसभा में अविराज सिंह ने भगवान विष्णु के वेंकटेश स्तोत्र का पाठ भी किया।
अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में ही भविष्यवाणी की थी कि कलयुग में अन्न के भंडार तो होंगे लेकिन मनुष्य की भूख समाप्त नहीं होगी। जल के सागर होंगे लेकिन प्यास नहीं बुझेगी। उन्होंने कहा कि कलयुग में स्वार्थ मनुष्य को इस प्रकार घेर लेगा कि कथनी और करनी में बड़ा अंतर दिखाई देगा। मनुष्य कुछ कहेगा और कुछ करेगा। धन और स्वार्थ के लिए लोग अपने आदर्श, संस्कार और धर्म तक का त्याग कर देंगे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने यह भी बताया था कि कलयुग में हर कदम पर मनुष्य के साथ छल होगा और लोग धन को धर्म और मर्यादा से अधिक महत्व देने लगेंगे।
उन्होंने कहा कि जब भी मनुष्य श्रीमद्भागवत कथा सुनता है तो उसके मन में भगवान श्रीकृष्ण के विचार और उनके भजन स्वतः आने लगते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला के पीछे कोई न कोई गंभीर संदेश छिपा हुआ है। श्रीकृष्ण ने मानव जीवन को धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलाने का संदेश दिया है। कलयुग में कथा श्रवण ही मनुष्य के लिए सबसे बड़ा सहारा है और कथा के माध्यम से ही व्यक्ति अपने जीवन की परेशानियों से बाहर निकल सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कलयुग को कथा का युग बताया था, जिसमें प्रभु की कथा ही मनुष्य को मानसिक शांति और आत्मिक बल प्रदान करेगी।
अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के माध्यम से यह सिखाया कि संकट के समय ही सच्चे मित्रों और संबंधों की पहचान होती है। जब युद्धभूमि में अर्जुन अपने ही परिवार और गुरुओं को सामने देखकर विचलित हो गए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें धर्म का महत्व समझाया। उन्होंने अर्जुन से कहा कि जो लोग अन्याय और अधर्म के समय मौन रहते हैं, वे भी अधर्म के भागीदार बन जाते हैं। धर्म की रक्षा के लिए कठिन निर्णय लेना भी आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि महाभारत का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना ही सच्चा धर्म है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। भगवान विष्णु ने जितने भी अवतार लिए, उनका उद्देश्य धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा करना रहा है। यदि भक्त प्रहलाद जैसी भक्ति हो, मीरा जैसा समर्पण हो और द्रौपदी जैसी पुकार हो तो भगवान को स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए आना पड़ता है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें विश्वास, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि फूल को खिलने के लिए सूर्य की किरण आवश्यक होती है, लेकिन मनुष्य को आगे बढ़ने और जीवन में सफल होने के लिए भगवान श्रीकृष्ण की शरण आवश्यक है।
अविराज सिंह ने कहा कि मनुष्य के जीवन में केवल पूजा-पाठ और भक्ति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अच्छे कर्म, अच्छी सोच और श्रेष्ठ आचरण भी आवश्यक हैं। यदि व्यक्ति दिनभर भक्ति करे लेकिन उसके व्यवहार में सत्य और सदाचार न हो तो ऐसी भक्ति का कोई महत्व नहीं रह जाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रावण भगवान शिव का बड़ा भक्त था, लेकिन उसके आचरण और विचार अधर्म से भरे हुए थे। वह नशे और भोग-विलास में लिप्त था, इसलिए भगवान शिव ने भी भगवान श्रीराम को रावण के विनाश के लिए आशीर्वाद दिया था। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें व्यक्ति का व्यवहार, वाणी और कर्म पवित्र हों।
उन्होंने कहा कि समाज में सत्य बोलना, अपने वचन का सम्मान करना और अच्छे संस्कारों को अपनाना ही वास्तविक धर्म है। केवल दिखावे की भक्ति से जीवन सफल नहीं होता, बल्कि अच्छे कर्मों और सच्चे व्यवहार से ही मनुष्य महान बनता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति दिनभर पूजा-पाठ करे लेकिन झूठ बोले और गलत आचरण अपनाए तो ऐसी भक्ति का कोई महत्व नहीं रह जाता। भगवान केवल उसी व्यक्ति की भक्ति स्वीकार करते हैं जिसके विचार और कर्म पवित्र होते हैं। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को धर्म, संस्कार, सत्य और भक्ति का संदेश देती है।
कार्यक्रम में पंडित श्री श्याम किशोर शास्त्री जी महाराज का उन्होंने सादर अभिनंदन किया तथा आयोजक एवं यजमान श्री राजू कुशवाहा सहित समस्त ग्रामवासियों, वरिष्ठजनों और मातृशक्ति का सम्मान किया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण भक्ति एवं श्रद्धा से सराबोर रहा।











