प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक जीवन कौशल का अनूठा संगम: अग्रणी महाविद्यालय में ‘दीक्षारंभ’ उत्सव का धमाकेदार समापन

प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक जीवन कौशल का अनूठा संगम: अग्रणी महाविद्यालय में ‘दीक्षारंभ’ उत्सव का धमाकेदार समापन

बेहतर राष्ट्र निर्माण के लिए केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि उच्च मूल्य एवं संस्कारों को भी ग्रहण करें – डॉ सरोज गुप्ता

सफलता के लिए केवल किताबी ज्ञान नहीं, मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक दृष्टिकोण भी है जरूरी: मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य दुबे

सागर/ पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित तीन दिवसीय ‘दीक्षारंभ एवं प्रवेश उत्सव’ का समापन बेहद गरिमामय और ज्ञानवर्धक माहौल में हुआ। समापन दिवस पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता एवं प्रवेश कार्यक्रम प्रभारी डॉ. अभिलाषा जैन के कुशल मार्गदर्शन में मानसिक स्वास्थ्य क्लब द्वारा एक विशेष ‘मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण उन्मुखीकरण’ कार्यक्रम का आयोजन किया।
सत्र का शुभारंभ नवागंतुक छात्र-छात्राओं का पुष्पगुच्छ देकर आत्मीय स्वागत के साथ हुआ, जिससे पूरा सभागार उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने छात्र-छात्राओं को संस्कारवान उच्च शिक्षा का संदेश देते हुए कहा कि भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा का निर्वहन करते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने इस तीन दिवसीय दीक्षारंभ कार्यक्रम को निर्देशित किया था। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को कॉलेज की विभिन्न सुविधाओं, समृद्ध शिक्षण संस्कृति और नैतिक मूल्यों से भली-भांति अवगत कराया गया है। प्राचार्य ने घोषणा की कि कल से महाविद्यालय में नियमित कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस परिसर से केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन में काम आने वाले उच्च मूल्य एवं संस्कारों को भी ग्रहण करें ताकि एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण हो सके।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और जिला चिकित्सालय सागर के सुप्रसिद्ध मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य दुबे ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन एवं जीवन कौशल जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति वही है जो न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी सुदृढ़ हो।
तनाव प्रबंधन और आज के युवाओं में बढ़ते इंटरनेट एडिक्शन (डिजिटल लत) पर आगाह करते हुए डॉ. आदित्य दुबे ने कहा कि किसी भी परिस्थिति के प्रति हमारी सकारात्मक या नकारात्मक सोच ही तनाव का कारण बनती है। अवसाद और आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को सही समय पर अपनों की सांत्वना या सही प्रेरणा मिल जाए, तो अनहोनी घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजाना 20 मिनट योग, मेडिटेशन या एक्सरसाइज करने, अपने शौक पूरे करने और परिवार के साथ अनिवार्य रूप से संवाद करने का मूलमंत्र दिया।
इसके बाद महाविद्यालय की विभिन्न छात्र-कल्याणकारी विधाओं और समितियों से जुड़े वरिष्ठ प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों को जागरूक किया। मानसिक स्वास्थ्य क्लब की प्रभारी श्रीमती रेणु सोलंकी ने कॉलेज में संचालित मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र और सलाहकार हेल्पलाइन नंबर की जानकारी साझा की। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अमर कुमार जैन ने परिसर में एंटी-रैगिंग के कड़े प्रावधानों को रेखांकित करने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और मर्यादित डिजिटल आचरण पर अपनी बात रखी। अर्थशास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुनील साहू ने महाविद्यालय परिसर को पूरी तरह समावेशी, सुरक्षित और भेदभाव मुक्त बनाने के प्रावधानों से अवगत कराया, तो वहीं खेल अधिकारी दयाराम राजपूत ने आगामी सत्र में आयोजित होने वाली विभिन्न खेल गतिविधियों की रूपरेखा सामने रखी। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. संगीता मुखर्जी ने महिला उत्पीड़न की रोकथाम और अन्य शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए कॉलेज में क्रियाशील हेल्प डेस्क एवं विभिन्न आंतरिक समितियों से छात्र-छात्राओं को परिचित कराया।
महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ संदीप सबलोक ने उपरोक्त संबंध में बताया कि सत्र के अंतिम पड़ाव में कॉलेज के सीनियर विद्यार्थियों ने भी नवागंतुक साथियों का हौसला बढ़ाया। अर्थशास्त्र एम.ए. में गत वर्ष सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली मेधावी छात्रा मुस्कान साहू और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में महाविद्यालय का गौरव बढ़ाने वाले छात्र निखिल शर्मा ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे इस संस्थान ने उनके व्यक्तित्व को संवारा है। इस कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की मनोवैज्ञानिक काउंसलर श्रीमती नीता यादव द्वारा किया गया।

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