
वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, संस्कृति और भविष्य की रक्षा का संकल्प – भूपेन्द्र सिंह
पूर्व गृह मंत्री विधायक
“एक वृक्ष, हजारों जीवनों का आधार”
भारतीय संस्कृति में वृक्षों को केवल हरियाली का प्रतीक नहीं माना गया, बल्कि उन्हें जीवन, धर्म, प्रकृति और सृष्टि के आधार के रूप में सम्मान दिया गया है। यही कारण है कि हमारे वेद, उपनिषद, पुराण और स्मृतियाँ वृक्षों को देवतुल्य मानकर उनकी रक्षा और संवर्धन का संदेश देती हैं। आज जब पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारतीय ऋषियों की हजारों वर्ष पुरानी यह जीवन-दृष्टि पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक दिखाई देती है।
अथर्ववेद में वनस्पतियों को रोगों का नाश करने वाली, जीवनदायिनी और अमृत के समान बताया गया है। भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैंकृ “अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्” अर्थात सभी वृक्षों में मैं पीपल हूँ। यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति भारतीय चिंतन की गहराई का प्रमाण है। हमारे यहां पीपल, वट, नीम, बेल, तुलसी, आंवला, अशोक और केले जैसे वृक्षों की पूजा की परंपरा इसलिए विकसित हुई ताकि आने वाली पीढ़ियाँ वृक्षों की रक्षा को अपना धार्मिक और सामाजिक कर्तव्य समझें।
पुराणों में कहा गया है –
“दशकूपसमावापी दशवापीसमो ह्रदः।
दशह्रदसमः पुत्रो दशपुत्रसमो द्रुमः।।”
अर्थात दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के समान एक वृक्ष का महत्व माना गया है। यह श्लोक बताता है कि भारतीय मनीषियों ने हजारों वर्ष पहले ही वृक्षों के महत्व को समझ लिया था। वृक्ष केवल फल, फूल और छाया ही नहीं देते, बल्कि वे जल, वायु, मिट्टी, जीव-जंतु और सम्पूर्ण जीवन-चक्र के संरक्षक हैं।
विज्ञान भी स्वीकार करता है वृक्षों की अनिवार्यता आज वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं कि यदि धरती पर जीवन को सुरक्षित रखना है तो वृक्षों की संख्या बढ़ाना अनिवार्य है। वृक्ष वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित रखने में सहायता करते हैं, भूजल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, जैव विविधता को सुरक्षित रखते हैं तथा गर्मी और प्रदूषण को कम करने में प्रभावी योगदान देते हैं। इसलिए वृक्षारोपण आज केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व बन चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार एक परिपक्व वृक्ष प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में कार्बन को अवशोषित करता है और अनेक लोगों के लिए स्वच्छ वायु उपलब्ध कराने में सहायक होता है। शहरों में जहां तापमान तेजी से बढ़ रहा है, वहां वृक्ष प्राकृतिक एयर-कंडीशनर की तरह काम करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वे खेतों की नमी बनाए रखने, पशुओं को आश्रय देने और जैविक संतुलन को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जल संकट और वृक्षों का संबंध आज देश के अनेक हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण वृक्षों की संख्या में कमी भी है। वृक्ष वर्षा के जल को धरती के भीतर पहुंचाने में सहायता करते हैं। जहां पर्याप्त हरियाली होती है वहां मिट्टी पानी को अधिक समय रोककर रखती है और भूजल का पुनर्भरण होता है। यदि हम जल संरक्षण चाहते हैं, तो हमें बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना ही होगा।
वृक्ष और मानव स्वास्थ्य प्रदूषित वातावरण आज अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है। वृक्ष वायु को शुद्ध करते हैं, धूल और धुएं को रोकते हैं तथा मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक होते हैं। आयुर्वेद में नीम, आंवला, बेल, अशोक, अर्जुन और पीपल जैसे वृक्षों को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है। इस दृष्टि से वृक्ष हमारे प्राकृतिक चिकित्सक भी हैं।
सिर्फ पौधे लगाना पर्याप्त नही वृक्ष लगाना जितना आवश्यक है, उससे कहीं अधिक आवश्यक उनका संरक्षण है। एक पौधा तभी वृक्ष बनता है, जब वर्षों तक उसकी देखभाल की जाए। अक्सर पौधारोपण अभियान तो बड़े उत्साह से आयोजित हो जाते हैं, लेकिन बाद में पौधों की देखरेख नहीं हो पाती। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी ले ले, तो कुछ ही वर्षों में हमारे गांव, कस्बे और शहर हरियाली से भर सकते हैं।
जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य बढ़ती आबादी, तेजी से हो रहा शहरीकरण और अंधाधुंध वृक्षों की कटाई ने प्रकृति के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अनियमित वर्षा, भीषण गर्मी, सूखा, बाढ़ और प्रदूषण जैसी समस्याएं हमें लगातार चेतावनी दे रही हैं कि यदि अभी भी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई गई तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा। इसलिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज के प्रत्येक नागरिक, प्रत्येक परिवार और प्रत्येक युवा को वृक्षारोपण को जनभागीदारी का अभियान बनाना होगा।
आने वाली पीढ़ियों को यदि स्वच्छ हवा, शुद्ध जल, संतुलित जलवायु और स्वस्थ जीवन देना है, तो वृक्षारोपण को जीवन का नियमित संस्कार बनाना होगा। यह केवल धरती को हरा-भरा बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि मानव सभ्यता को सुरक्षित रखने का संकल्प है।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि प्रत्येक पौधा हमारे भविष्य का प्रहरी है, प्रत्येक वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के जीवन का आधार है, और वृक्षों की रक्षा करना ही वास्तव में मानवता की रक्षा करना है।
हम सभी ने मिलकर 18 जुलाई को खुरई विधानसभा क्षेत्र में एक ही दिन में 1 लाख 20 हजार पौधे लगाने का संकल्प लिया है। यह केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी धरती, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का महाअभियान है।
मैं खुरई विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक, युवा, किसान, मातृशक्ति, विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं सभी साथियों से आत्मीय आग्रह करता हूँ कि वे इस जनअभियान में सहभागी बनें आ एक पेड़ माँ के नाम अवश्य लगाएँ। साथ ही उस पौधे के संरक्षण का भी संकल्प लें, क्योंकि लगाया हुआ पौधा तभी सार्थक है, जब वह वृक्ष बनकर समाज और प्रकृति की सेवा करे।
आइए, हम सब मिलकर हरित, समृद्ध और स्वच्छ खुरई विधानसभा के निर्माण का संकल्प लें। आपका एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे अमूल्य उपहार होगा।











