अग्रणी महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा मनाई गई राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती

अग्रणी महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा मनाई गई राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती

​मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य संवेदनशीलता, त्याग और राष्ट्रीय चेतना की अमर पाठशाला: प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता

​खड़ी बोली को समृद्ध कर हिंदी साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम को दी नई दिशा; विद्यार्थियों ने किया ओजस्वी काव्य पाठ

​सागर/ पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर के हिंदी विभाग के तत्वावधान में ‘राष्ट्रकवि’ मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जन्मजयंती अत्यंत उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. सरोज गुप्ता ने की। इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय शर्मा एवं वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमर कुमार जैन की विशेष उपस्थिति रही।

​स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नई दिशा देने वाले संवेदनशील साहित्यकार: डॉ. सरोज गुप्ता

अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सरोज गुप्ता ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक अवदान को याद करते हुए कहा कि गुप्त जी ने खड़ी बोली में कालजयी महाकाव्यों एवं खंडकाव्यों की रचना कर हिंदी साहित्य को एक नई दिशा और पहचान दी। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में राष्ट्रीय चेतना भरने वाले अत्यंत संवेदनशील साहित्यकार थे। डॉ. गुप्ता ने गुप्त जी से जुड़े प्रेरक संस्मरण साझा करते हुए विद्यार्थियों से उनके साहित्य में निहित संवेदनशीलता, त्याग, राष्ट्रप्रेम और समर्पण के मूल्यों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विचार व्यक्त करते हुए हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राना कुंजर सिंह ने कहा कि राष्ट्रकवि को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि आज प्रत्येक विद्यार्थी उनकी कम से कम एक कविता का मर्म समझे और उसे अवश्य पढ़े।
जयंती समारोह के दौरान हिंदी विभाग के शोधार्थी आदित्य प्रताप सिंह ने “जीवन की कविता” का पाठ किया। वहीं स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों— गोविंद कुर्मी ने प्रसिद्ध रचना “नर हो, न निराश करो मन को…”, तथा ज्योति दांगी, मुस्कान यादव, राज आर्यन, नीलेश, वीर सिंह एवं खुशबू पटेल ने मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख कविताओं के अंशों का सुमधुर काव्य पाठ किया व उनके साहित्यिक योगदान पर अपने विचार रखे।

समारोह में डॉ. वसुंधरा गुप्ता, डॉ. अनिल मेहरोलिया, डॉ. शालिनी सिंह परिहार सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन डॉ. सुरेंद्र यादव द्वारा किया गया तथा अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. राना कुंजर सिंह ने किया।

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