
सागर। सागर जिले के रजवांस ग्राम में विराजमान आर्यिका सत्यार्थमति माताजी के गृहस्थ अवस्था के पिता श्री ने धर्म के मार्ग पर एक और महत्वपूर्ण चरण पार करते हुए दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की और समाधि मरण को प्राप्त किया। 76 वर्षीय मुनि श्री सत्य सागर जी महाराज की करीब 10 दिनों से चल रही संल्लेखना आज समाधि मरण के साथ पूर्ण हुई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 29 अगस्त को मोराजी में आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ने उन्हें क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की थी। क्षुल्लक दीक्षा के बाद से ही वे निरंतर आहार, जल आदि का क्रमशः त्याग करते हुए कठोर तप और साधना में लीन रहे।
आज आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ने उन्हें दिगंबर मुनि दीक्षा प्रदान की तथा उनका नामकरण मुनि श्री सत्य सागर जी महाराज किया। दीक्षा के पश्चात उन्होंने संल्लेखना की साधना को पूर्ण करते हुए सायं 5:57 बजे समाधि मरण प्राप्त किया।
गृहस्थ जीवन में विदिशा जिले के सलामतपुर निवासी थे
मुनि श्री सत्य सागर जी महाराज गृहस्थ अवस्था में विदिशा जिले के सलामतपुर के निवासी थे। उनकी क्षुल्लक दीक्षा भी उनकी गृहस्थ अवस्था की पुत्री एवं वर्तमान में आर्यिका सत्यार्थमति माताजी की प्रेरणा से हुई थी। पुत्री और पिता दोनों का गृहस्थ जीवन त्यागकर धर्म मार्ग पर साथ-साथ आगे बढ़ना जैन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और उत्साहवर्धक प्रसंग माना जा रहा है।
णमोकार मंत्र और भक्तामर पाठ के साथ विनयांजलि
मुनि श्री के समाधि मरण का समाचार मिलते ही बड़ी संख्या में धर्मावलंबी मोराजी पहुंचे। उपस्थित श्रद्धालुओं ने णमोकार मंत्र जाप एवं भक्तामर जी के पाठ के साथ मुनि श्री को विनयांजलि अर्पित की।
जैन आगम परंपरा में समाधि मरण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। प्रत्येक श्रावक का भाव रहता है कि जीवन का अंतिम क्षण शांत, संयमित और समाधि भाव के साथ हो। इसी भावना के अनुरूप मुनि श्री सत्य सागर जी महाराज ने तप, त्याग और संयम की साधना करते हुए समाधि मरण प्राप्त किया।
10 अगस्त को निकलेगी डोला यात्रा
जानकारी के अनुसार 10 अगस्त को प्रातः 7:30 बजे मोराजी से मुनि श्री सत्य सागर जी महाराज की डोला यात्रा प्रारंभ होगी। इसके बाद मंगलगिरी में धार्मिक विधि-विधान एवं अनुष्ठान के अनुरूप अंतिम क्रियाएं संपन्न की जाएंगी।
यह संपूर्ण जानकारी श्रद्धालु आलोक जैन सोंरई द्वारा प्रदान की गई।











