
देवेश पाण्डेय
समुद्र मंथन के 14 रत्नों में से एक है प्रयागराज का अक्षय वट अब आसानी से कर पाएंगे दर्शन
प्रयागराज महाकुम्भ मेला में पहुंचकर संगम में डुबकी लगाने वालों को कोई दिक्कत और परेशानी ना हो इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार लगातार निर्माण कार्य और सौंदर्यीकरण के काम करा रही है इसी के तहत प्रयागराज पूर्व नाम इलाहाबाद में मौजूद ऐतिहासिक चीजों को भी सहेजने का काम किया जा रहा है प्रयागराज में एक से बढ़कर एक कई ऐतिहासिक चीजें मौजूद हैं इनमें से एक अक्षयवट वृक्ष भी है तो हम आपको इसके महत्व के बारे में बताने के साथ ही यह भी बताएंगे कि इसे सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए क्या किया जा रहा है अक्षयवट की मान्यता समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में कल्पवृक्ष के अंश के रूप में है माना जाता है कि इस वृक्ष में ब्रह्मा-विष्णु और महेश निवास करते हैं इस वृक्ष को और इसके आसपास के क्षेत्र को आकर्षक बनाने के लिए सरकार की तरफ से यहां एक कॉरिडोर बनाया गया जो प्रयागराज के सबसे सुंदर स्थान में शामिल हो गया है यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पहले अक्षय वट वृक्ष की जड़ देखने के लिए लंबी लाइन लगानी होती थी अब वहां सुविधा बढ़ने से लोगों को आराम हो गया है अक्षय वट को तीर्थराज प्रयागराज के रक्षक श्रीहरि विष्णु के वेणी माधव का साक्षात स्वरूप माना जाता है अक्षय वट को कॉरीडोर रूप में महाकुम्भ के पूर्व सुव्यवस्थित करने का काम पीएम मोदी के विजन और सीएम योगी के कुशल क्रियान्वयन में किया गया है अक्षय वट को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसकी जड़ों में सृष्टि निर्माता ब्रह्मा मध्य भाग में वेणी माधव स्वरूप श्रीहरि विष्णु और अग्र भाग में महादेव शिव शंकर का वास है इनकी पूजा के साथ ही समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में कल्पवृक्ष के अंश के रूप में भी अक्षय वट की मान्यता है पुराणों में प्राप्त उल्लेख के अनुसार सर्व सिद्धि प्रदान करने वाली आध्यात्मिक शक्ति के केंद्र के तौर पर प्रसिद्ध अक्षय वट ने मुगल काल और अंग्रेजों के शासन में पराभव का दंश झेला मगर इसके बावजूद वह बना रहा आज यह वृक्ष सनातन धर्म के ध्वजवाहक के तौर पर विश्व भर में अपनी पहचान को पुख्ता कर रहा है अक्षय वट के बारे में यह भी प्रसिद्ध है कि भगवान राम ने लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने से पहले पुष्पक विमान से आते हुए अक्षय वट के दर्शन किए थे उनके साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण भी थे अक्षय वट पर इन तीनों के ही विग्रह का पूजन होता है











