धामोनी मस्जिद का ताला खुलवाने पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी के साथ जिला कलेक्टर से मिला प्रतिनिधि मण्डल

धामोनी मस्जिद का ताला खुलवाने पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी के साथ जिला कलेक्टर से मिला प्रतिनिधि मण्डल।

उर्स की तिथियों को दृष्टिगत रखते हुए मस्जिद का ताला खुलवाने का किया आग्रह।

प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम का पालन सुनिश्चित करने की मांग।

सर्वधर्म कौमी एकता के प्रतीक धामोनी वाले बाबा की दरगाह परिसर स्थित वर्षों पुरानी मस्जिद में पुरातत्व विभाग द्वारा लगाए गए ताले को खुलवाने तथा प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम,1958 एवं नियम,1959 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराने को लेकर मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर प्रतिभा पाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया कि धामोनी वाले बाबा के सालाना उर्स को दृष्टिगत रखते हुए मस्जिद में लगाया गया ताला तत्काल प्रभाव से खुलवाया जाए, ताकि परंपरागत धार्मिक गतिविधियाँ पूर्व की भाँति सुचारु रूप से संचालित हो सकें।पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी के साथ प्रतिनिधि मंडल में शामिल दरगाह प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष काजी खान बहादुर, दरगाह कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारुन तथा जिला वक्फ कमेटी के पूर्व प्रवक्ता अशरफ खान ने जिला कलेक्टर को अवगत कराया कि ग्राम इस्हाकपुरा (धामोनी) तहसील बण्डा जिला सागर स्थित बाबा बालजति शाह की दरगाह एवं मस्जिद परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित केंद्रीय स्मारक है। परिसर स्थित सैकड़ों साल पुरानी धामोनी मस्जिद में दिनांक 10 सितम्बर 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, उपमण्डल कार्यालय सागर द्वारा ताला लगा दिया गया हैं।प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि मस्जिद में ताला लगानें के कारण मुस्लिम समुदाय की परंपरागत धार्मिक गतिविधियाँ बाधित हो रही हैं,जो जनभावनाओं को प्रभावित कर रही हैं।उन्होंने कहा कि धामोनी मस्जिद में वर्षों से नियमित रूप से नमाज़ अदा की जाती रही है तथा यह क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहज़ीब और कौमी एकता का प्रतीक रहा है।प्रतिनिधि मंडल ने प्रासंगिक विधिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 तथा नियम 1959 के अंतर्गत संरक्षित स्मारकों के संरक्षण के साथ-साथ उनके परंपरागत धार्मिक स्वरूप एवं उपयोग को भी ध्यान में रखने का प्रावधान है।साथ ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता तथा धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करते हैं। माननीय न्यायालयों द्वारा भी समय-समय पर यह स्थापित किया गया है कि जहाँ किसी संरक्षित स्थल का ऐतिहासिक रूप से धार्मिक उपयोग होता रहा हो, वहाँ संरक्षण एवं धार्मिक अधिकारों के मध्य संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। मस्जिद में लगाए गए ताले के कारण परंपरागत धार्मिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं, इसलिए प्रशासन इस विषय में संवेदनशीलता के साथ उचित निर्णय लेते हुए शीघ्र समाधान सुनिश्चित करे।प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर को बताया कि प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी धामोनी वाले बाबा का तीन दिवसीय सालाना उर्स 08 मई से 10 मई तक आयोजित होगा, जिसमें मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसी स्थिति में मस्जिद का बंद रहना जनभावनाओं एवं कानून-व्यवस्था की दृष्टि से उचित नहीं है।उर्स प्रारंभ होने से पूर्व मस्जिद का ताला खुलवाया जाना आवश्यक है।इस दौरान प्रतिनिधि मंडल में मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी, धामोनी दरगाह प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष काजी खान बहादुर,पूर्व अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारुन, जिला वक्फ कमेटी के पूर्व प्रवक्ता अशरफ खान, इंजी.सत्यम सिंह आदि मौजूद थे।

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