बरसात में बढ़ रहे नेत्र संक्रमण पर आईएमए और सागर ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी का जनजागरण अभियान, फंगल स्क्लेराइटिस बन सकता है अंधत्व का कारण

बरसात में बढ़ रहे नेत्र संक्रमण पर आईएमए और सागर ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी का जनजागरण अभियान, फंगल स्क्लेराइटिस बन सकता है अंधत्व का कारण

सागर, 04 जुलाई। बरसात का मौसम शुरू होते ही आंखों के संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर शाखा एवं सागर ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में इंद्रा नेत्र अस्पताल में कंजंक्टिवाइटिस एवं फंगल स्क्लेराइटिस विषय पर विशेष जनजागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर नेत्र रोगों की रोकथाम और समय पर उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त की।
विशेषज्ञों ने बताया कि बरसात के मौसम में कंजंक्टिवाइटिस के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। अधिकांश मरीज समय पर चिकित्सकीय सलाह नहीं लेते, जिससे संक्रमण गंभीर रूप धारण कर सकता है। इसलिए आंखों में लालिमा, पानी आना, दर्द या धुंधलापन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि फंगल स्क्लेराइटिस आंख के सफेद भाग (स्क्लेरा) का अत्यंत गंभीर एवं दुर्लभ संक्रमण है, जो प्रायः पौधों की टहनियों, पत्तियों अथवा मिट्टी से आंख में चोट लगने के बाद विकसित होता है। उन्होंने बताया कि Fusarium एवं Aspergillus फंगस इसके प्रमुख कारण हैं। मोतियाबिंद या टेरीजियम की सर्जरी करा चुके मरीजों, मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों तथा लंबे समय तक स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स का उपयोग करने वालों में इसका खतरा अधिक रहता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप चावला ने बताया कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में आंख में असहनीय एवं चुभने वाला दर्द, लगातार लालिमा, धुंधला दिखाई देना, रोशनी से परेशानी, अत्यधिक पानी आना तथा आंख के सफेद भाग पर पीले रंग की गांठ या पस का बनना शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षणों को सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज करना गंभीर भूल हो सकती है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अदिति दूबे ने बताया कि फंगल स्क्लेराइटिस का उपचार लंबा और चुनौतीपूर्ण होता है। मरीजों को कई सप्ताह अथवा महीनों तक एंटीफंगल आई ड्रॉप्स एवं दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि संक्रमण अधिक बढ़ जाए तो संक्रमित ऊतक को हटाने के लिए शल्य चिकित्सा (डिब्राइडमेंट) करनी पड़ती है। उन्होंने चेतावनी दी कि उपचार में विलंब होने पर स्क्लेरा का गलना, संक्रमण का आंख के भीतरी भागों तक फैलना, स्थायी अंधापन तथा गंभीर परिस्थितियों में संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए आंख निकालने तक की नौबत आ सकती है।
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि पौधों या मिट्टी से आंख में चोट लगने पर घरेलू उपचार करने के बजाय तत्काल नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप्स का उपयोग बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे फंगल संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है। उन्होंने खेती, बागवानी एवं अन्य जोखिम वाले कार्यों के दौरान सुरक्षात्मक चश्मा पहनने तथा चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का पूरा कोर्स लेने की अपील की।

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