आईएमए की पहल : सुरक्षित मातृत्व के लिए समय पर जांच और संस्थागत प्रसव जरूरी

आईएमए की पहल : सुरक्षित मातृत्व के लिए समय पर जांच और संस्थागत प्रसव जरूरी

सागर, 11 सितंबर। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), सागर द्वारा सुरक्षित मातृत्व जागरूकता कार्यक्रम आयुष्मान आरोग्य मंदिर बड़कुवाँ में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को प्रसवपूर्व जांच, पोषण, गर्भावस्था के दौरान खतरे के संकेत तथा संस्थागत प्रसव के महत्व की जानकारी सरल भाषा में दी गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि गर्भावस्था बीमारी नहीं, बल्कि मां और बच्चे के जीवन का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने बताया के नियमित प्रसवपूर्व जांच, संतुलित पोषण और खतरे के संकेतों की समय पर पहचान सुरक्षित मातृत्व की मजबूत नींव है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य संस्थान पहुंचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गर्भावस्था की शुरुआत से ही स्वास्थ्यकर्मी के संपर्क में रहना और निर्धारित समय पर जांच कराना आवश्यक है। इससे मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा सकती है तथा किसी संभावित समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

नियमित प्रसवपूर्व जांच से कम होगा जोखिम

कार्यक्रम में उन्होंने बताया के गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच से खून की कमी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान समय पर की जा सकती है। साथ ही बच्चे की वृद्धि और विकास की भी निगरानी होती है।

महिलाओं को चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार आवश्यक जांच कराने तथा आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम जैसी दवाएं नियमित लेने की सलाह भी दी। बिना चिकित्सकीय परामर्श के कोई दवा लेने से बचने को भी कहा।

पौष्टिक भोजन से मां और शिशु दोनों को लाभ

डॉ. साद ने कहा कि गर्भावस्था में भोजन की मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दूध एवं दूध से बने पदार्थ, अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए।

महिलाओं को पर्याप्त आराम, व्यक्तिगत स्वच्छता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार शारीरिक गतिविधि बनाए रखने की जानकारी भी दी।

खतरे के संकेतों को पहचानना जरूरी

डॉ तल्हा साद ने गर्भावस्था के दौरान गंभीर संकेतों की जानकारी देते हुए कहा कि अचानक या अधिक रक्तस्राव, तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधला दिखाई देना, चेहरे या हाथ-पैरों में अचानक अधिक सूजन, तेज पेट दर्द, तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, दौरे पड़ना या गर्भ में बच्चे की हलचल कम होना जैसे लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

ऐसे किसी भी लक्षण की स्थिति में घरेलू उपचार या इंतजार करने के बजाय तुरंत स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मां और बच्चे को गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद मिल सकती है।

संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता

कार्यक्रम में आईएमए अध्यक्ष डॉ तल्हा साद ने अस्पताल या अधिकृत स्वास्थ्य संस्थान में संस्थागत प्रसव कराने पर विशेष जोर दिया । उन्होंने बताया के प्रसव के दौरान अचानक उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने परिवारों को सलाह दी के गर्भावस्था के दौरान ही प्रसव के लिए उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान तय करें और वहां तक पहुंचने की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित रखें। इससे आपात स्थिति में समय की बचत हो सकती है।

परिवार का सहयोग भी जरूरी

कार्यक्रम में डॉ साद ने बताया के सुरक्षित मातृत्व की जिम्मेदारी केवल गर्भवती महिला की नहीं है। पति और परिवार के सदस्यों को महिला के पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम, नियमित जांच और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करना चाहिए।

डॉ साद ने उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने और नियमित रूप से स्वास्थ्यकर्मियों के संपर्क में रहने की अपील की।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में पिरामल स्वास्थ्य की आयुषी शुक्ला का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और नागरिकों ने भी सक्रिय सहभागिता की।

आईएमए सागर ने कहा कि “समय पर जांच, खतरे के संकेतों की पहचान और सुरक्षित संस्थागत प्रसव—मां और बच्चे की सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण आधार हैं।” संस्था द्वारा भविष्य में भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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