
पंचायत की दुकानों के आवंटन पर उठे सवाल, हैंडओवर से पहले कब्जे का आरोप
20 से 22 दुकानों के निर्माण, आवंटन और राशि की जांच की मांग; पंचों की शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा
देवरी/गौरझामर। सागर जिले की देवरी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गौरझामर में पुलिस थाने के पीछे पंचायत की राशि से निर्मित करीब 20 से 22 दुकानों के आवंटन और उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकानों का विधिवत हैंडओवर किए जाने से पहले ही कुछ आवंटित दुकानों पर कब्जा कर उनका उपयोग शुरू कर दिया गया है। वहीं कुछ दुकानों को अन्य लोगों को किराए पर दिए जाने की बात भी सामने आ रही है।
सूत्रों के अनुसार दुकानों के आवंटन के लिए करीब 1.90 लाख रुपये प्रति दुकान की राशि निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि दुकानों से प्राप्त राशि किस माध्यम से वसूल की गई और क्या पूरी राशि ग्राम पंचायत के आधिकारिक खाते में जमा हुई है। हालांकि राशि के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हैंडओवर से पहले उपयोग का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार पंचायत द्वारा दुकानों का विधिवत हैंडओवर किए जाने से पहले ही कुछ दुकानदारों ने उनमें व्यवसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। कुछ दुकानों को अन्य व्यक्तियों को किराए पर दिए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि बिना विधिवत हैंडओवर अथवा अनुमति के दुकानों का उपयोग और किराए पर देना किस प्रक्रिया के तहत हुआ।
दो दुकानों के बीच की दीवार तोड़ने का आरोप
मामले में दुकान क्रमांक 2 और 3 के बीच की अंदरूनी दीवार को तोड़कर दोनों दुकानों को एक करने का आरोप भी सामने आया है। यदि यह कार्य पंचायत की अनुमति के बिना किया गया है, तो शासकीय संपत्ति की संरचना में किए गए इस बदलाव की भी जांच आवश्यक है।
पंचों ने भी उठाया था मामला
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत गौरझामर के कुछ पंचों द्वारा पूर्व में भी दुकानों के मामले को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस संबंध में सागर कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि शिकायत के बाद क्या कार्रवाई की गई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों ने दुकानों के निर्माण से लेकर आवंटन, निर्धारित राशि की वसूली, पंचायत खाते में राशि जमा होने, हैंडओवर प्रक्रिया और दुकानों में किए जा रहे निर्माण अथवा बदलाव की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि संबंधित अधिकारी मौके पर निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच करें, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सचिव ने कहा—मुझे जानकारी नहीं
मामले में ग्राम पंचायत गौरझामर के सचिव गोविंद तिवारी से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया। उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और वे मामले में कोई जानकारी नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि “आपको जो लिखना है, लिख सकते हैं।”
सरपंच ने बाद में जानकारी देने की बात कही
वहीं ग्राम पंचायत गौरझामर की सरपंच श्रीमती बबीता विश्वकर्मा से भी मामले को लेकर जानकारी लेने का प्रयास किया गया। उन्होंने तत्काल कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया और कहा कि वह थोड़ी देर बाद मामले की पूरी जानकारी उपलब्ध कराएंगी। सरपंच की ओर से विस्तृत जानकारी अथवा स्पष्टीकरण मिलने के बाद उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।
अब देखना यह है कि पंचायत की इन दुकानों के आवंटन, राशि और हैंडओवर प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच होती है या नहीं। दस्तावेजों और पंचायत के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुकानों का आवंटन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और प्राप्त राशि का पंचायत खाते में क्या लेखा-जोखा है।







