
मां की अंतिम इच्छा का सम्मान, बेटों ने कराया नेत्रदान
बीएमसी आई बैंक ने सुरक्षित किए दोनों कॉर्निया, परिवार के निर्णय की सराहना
सागर, 24 सितंबर 2026। शहर के संत रविदास वार्ड स्थित कांच गोदाम निवासी 70 वर्षीय श्रीमती शांति लालवानी के निधन के बाद उनके परिवार ने मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान कराया। जीवनकाल में श्रीमती लालवानी ने नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की थी। उनके निधन के बाद बेटों ने शोक की घड़ी में भी उनकी इच्छा को प्राथमिकता देते हुए दोनों आंखों के कॉर्निया दान करने का निर्णय लिया।
श्रीमती शांति लालवानी का 22 सितंबर की रात करीब 8 बजे निधन हुआ। निधन की सूचना मिलते ही उनके बड़े पुत्र शंकर लालवानी ने बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय (बीएमसी) के नेत्र रोग विभाग एवं आई बैंक से संपर्क किया। सूचना मिलने पर नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे के मार्गदर्शन में आई बैंक की टीम तत्काल उनके निवास पर पहुंची।
परिजनों की लिखित सहमति के बाद आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया और सावधानियों का पालन करते हुए टीम ने दोनों आंखों के कॉर्निया सुरक्षित रूप से प्राप्त किए। दोनों कॉर्निया को बीएमसी आई बैंक में सुरक्षित रखा गया है, ताकि नियमानुसार जरूरतमंद मरीजों के उपचार में इनका उपयोग किया जा सके।
बेटों ने निभाया मां की इच्छा का सम्मान
बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर एवं नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने दिवंगत श्रीमती शांति लालवानी के पुत्रों शंकर लालवानी, जय लालवानी एवं रितेश लालवानी के प्रति आभार व्यक्त किया।
डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने कहा कि नेत्रदान समाज के लिए अत्यंत पुनीत कार्य है। शोक की घड़ी में भी परिवार द्वारा दिवंगत मां की इच्छा को पूरा करने का निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक है। ऐसे प्रयासों से नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ती है और जरूरतमंदों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद कायम होती है।
इस नेत्रदान प्रक्रिया में आई बैंक की टीम के डॉ. अजय, डॉ. हर्षिता, डॉ. पंकज और डॉ. पुष्पेंद्र के साथ नर्सिंग स्टाफ एवं पैरामेडिकल विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास जारी
बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि बीएमसी आई बैंक की ओर से लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने और जरूरतमंद मरीजों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
लालवानी परिवार द्वारा अपनी मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए किया गया नेत्रदान समाज में मानवीय संवेदना और जागरूकता का संदेश देता है। परिवार के इस निर्णय से अन्य लोग भी नेत्रदान के लिए आगे आने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।







