लोकतंत्र को कमजोर करने वाली राजनीति का जवाब जागरूक युवा देंगे, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण : श्याम तिवारी
मतदाता सूची शुद्ध हो रही है तो कांग्रेस को परेशानी क्यों? चुनावी हार का दोष संस्थाओं पर मढ़ना बंद करे विपक्ष : वृन्दावन अहिरवार
सागर। भारतीय जनता पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के अंतर्गत मंगलवार को महाराणा प्रताप नर्सिंग कॉलेज, सागर में युवा एवं विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकतंत्र की मजबूती, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया तथा वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। युवाओं एवं विद्यार्थियों ने भी लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर खुलकर अपने विचार रखे और वक्ताओं से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सागर विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार एवं जिला महामंत्री सुमित यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर संगीता संजय सिंह, अभियान जिला संयोजक मनीष चौबे, सहसंयोजक कविता लारिया, जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन एवं अधिवक्ता दीपा तिवारी मंचासीन रहीं। कार्यक्रम का संचालन अभियान सहसंयोजक नितिन सोनी ने किया।
भारत विश्वशक्ति बनने की ओर अग्रसर, लोकतंत्र को कमजोर करने के प्रयास राष्ट्रहित के विपरीत : शैलेन्द्र कुमार जैन
युवा एवं विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों की आस्था, विश्वास और संवैधानिक मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति है। लोकतंत्र में सत्ता प्राप्त करने का मार्ग जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि हिंसा, अराजकता अथवा संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने से।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक पटल पर नई शक्ति, सामर्थ्य और आत्मविश्वास के साथ उभर रहा है। विश्व के प्रमुख देशों के बीच भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में देश की एकता, लोकतांत्रिक स्थिरता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।
जैन ने विपक्ष की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि जब भारत विश्व में एक सशक्त राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है, तब विपक्ष के कुछ तत्व राष्ट्रविरोधी शक्तियों के साथ मिलकर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन सत्ता प्राप्ति की महत्वाकांक्षा में राष्ट्रीय हितों और संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित से बड़ा कोई राजनीतिक स्वार्थ नहीं हो सकता और लोकतंत्र में जनता के जनादेश से बड़ा कोई निर्णय नहीं होता। विपक्ष को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का अधिकार जनता के पास है, न कि हिंसा, अराजकता अथवा राजनीतिक दबाव बनाने वालों के पास।
वर्ष 1975 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए जैन ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का वह काला अध्याय आज भी नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के महत्व की याद दिलाता है। उस दौर में विपक्षी नेताओं को जेलों में बंद किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने कभी देश में आपातकाल लगाकर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का कार्य किया, आज वही कांग्रेस लोकतंत्र की रक्षा का दावा कर रही है। कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास से सीख लेते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए।
युवाओं को संबोधित करते हुए जैन ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी केवल राजनीतिक घटनाक्रमों की दर्शक नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की निर्णायक भागीदार है। डिजिटल युग में सूचनाओं का प्रसार जितनी तेजी से होता है, उतनी ही आवश्यकता उनके सत्यापन की भी है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे किसी भी राजनीतिक विषय पर अपनी राय बनाने से पहले उसके ऐतिहासिक संदर्भ, संवैधानिक पहलुओं और वास्तविक तथ्यों का अध्ययन करें। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जागरूक, जिम्मेदार और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिकों में निहित होती है।
संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास फैलाकर लोकतंत्र मजबूत नहीं किया जा सकता : श्याम तिवारी
भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जनता के अटूट विश्वास पर आधारित है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि देश की युवा पीढ़ी राजनीतिक घटनाक्रमों को केवल सुनी-सुनाई बातों या सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक सूचनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों, तर्कों और संवैधानिक व्यवस्थाओं के आधार पर समझे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को संदेह के घेरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
तिवारी ने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सहित विपक्ष के कुछ नेता निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम और अविश्वास का वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था के निर्णय से असहमति होने पर संविधान और कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी बात रखने तथा न्याय प्राप्त करने के अधिकार उपलब्ध हैं। लेकिन संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव बनाना और जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है।
तिवारी ने युवाओं से कहा कि वे विभिन्न राजनीतिक दलों की कार्यशैली, नेतृत्व, नीतियों और निर्णयों का तुलनात्मक अध्ययन करें। केवल राजनीतिक नारों और आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय स्वयं विचार करें कि देश के विकास, लोकतंत्र की मजबूती और राष्ट्रीय हितों के लिए कौन-सी नीतियां और निर्णय उचित हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जागरूक नागरिक हैं और देश की युवा पीढ़ी इस शक्ति की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। जब युवा तथ्यों को समझकर प्रश्न पूछते हैं, तर्कपूर्ण विचार रखते हैं और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सजग रहते हैं, तभी लोकतंत्र अधिक सशक्त होता है।
तिवारी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे राजनीतिक विषयों पर अपनी स्वतंत्र सोच विकसित करें, तथ्यों की पड़ताल करें और समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
शुद्ध मतदाता सूची से कांग्रेस को आपत्ति क्यों? लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है : वृन्दावन अहिरवार
नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती का सबसे महत्वपूर्ण आधार निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी निर्वाचन प्रक्रिया है। इसके लिए मतदाता सूची का शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कोई नई व्यवस्था नहीं है। पूर्व में भी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती रही हैं।
अहिरवार ने कहा कि मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों के नाम बने रहना, स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके नागरिकों के नाम पुराने पते पर दर्ज रहना अथवा किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होना जैसी विसंगतियों का नियमानुसार निराकरण किया जाना आवश्यक है। साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे।
उन्होंने कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मतदाता सूची की शुद्धता निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है, तो कांग्रेस को इस प्रक्रिया से परेशानी क्यों हो रही है?
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विवाह के बाद किसी महिला का नाम मायके और ससुराल दोनों स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज रह जाना अथवा किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची में बने रहना जैसी त्रुटियों को दूर करना चुनावी पारदर्शिता के लिए आवश्यक है।
अहिरवार ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बनाने अथवा बदलने का अधिकार केवल जनता के पास है। जनता अपने विवेक और अनुभव के आधार पर यह तय करती है कि कौन-सा जनप्रतिनिधि और कौन-सा राजनीतिक दल उसके विश्वास पर खरा उतरता है।
मध्यप्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी लगातार चुनावी असफलताओं के कारणों पर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर युवाओं के बीच भ्रम एवं असंतोष उत्पन्न करने का प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।
उन्होंने कहा कि चुनाव में हार और जीत लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है। जनता का निर्णय स्वीकार करना ही लोकतांत्रिक परिपक्वता की पहचान है। राजनीतिक दलों को जनादेश का सम्मान करते हुए जनता के बीच अपने कार्यों, नीतियों और विचारों के आधार पर विश्वास अर्जित करना चाहिए।
अहिरवार ने युवाओं से आह्वान किया कि वे मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को समझें, उससे संबंधित तथ्यों की पड़ताल करें और समाज में सही एवं प्रामाणिक जानकारी पहुंचाने का कार्य करें।








