सागर, 20 सितंबर 2026। जल ही जीवन है, लेकिन लगातार घटता जलस्तर, सूखते जलस्रोत और जल संकट की बढ़ती चुनौती आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसी चुनौती से निपटने और जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया गया। सागर जिले में यह अभियान जनभागीदारी, श्रमदान और जागरूकता के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव का उदाहरण बनकर सामने आया है।
सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत जल संरक्षण की इस पहल ने गांवों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लोगों को जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन से जोड़ा। सागर जिले में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक संचालित अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य किए गए।
अभियान के अंतर्गत जिले में 8,772 जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य पूर्ण किए गए। इन कार्यों के माध्यम से लगभग 55 लाख 96 हजार घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता निर्मित हुई। इससे वर्षा जल को संरक्षित करने, भूजल स्तर को बेहतर बनाने और स्थानीय जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार हुआ है।
302 अमृत मित्र बने जल संरक्षण के सारथी
जल गंगा संवर्धन अभियान को जन-भागीदारी से जोड़ने में 302 अमृत मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अमृत मित्रों ने गांव-गांव पहुंचकर लोगों को जल संरक्षण के महत्व की जानकारी दी और श्रमदान के माध्यम से जल संरक्षण कार्यों में सहभागिता की। उनके प्रयासों से जल बचाने का संदेश आमजन तक पहुंचा और जल संरक्षण को सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाने में मदद मिली।
पर्यावरण संरक्षण को भी मिला बढ़ावा
अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा गया। जिले में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण और पर्यावरण एवं जल संरक्षण संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जल और पर्यावरण के आपसी संबंध को समझाते हुए लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनका संरक्षण करने के लिए प्रेरित किया गया।
स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पेयजल की गुणवत्ता की जांच
बच्चों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने की दिशा में भी अभियान के तहत विशेष प्रयास किए गए। जिले के 4,612 स्कूलों एवं आंगनवाड़ियों में पानी की गुणवत्ता का परीक्षण कराया गया। इसके साथ ही पानी की टंकियों की व्यापक स्तर पर साफ-सफाई कराई गई, ताकि बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।
429 पोषण वाटिकाओं का निर्माण
अभियान के दौरान जल संरक्षण के साथ पोषण और पर्यावरण को भी जोड़ा गया। जिले में 429 पोषण वाटिकाओं का निर्माण किया गया। इन वाटिकाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर पोषण, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
जल से जीवन तक बदलाव की कहानी
जल गंगा संवर्धन अभियान ने सागर जिले में जल संरक्षण को लेकर जनभागीदारी की नई तस्वीर प्रस्तुत की है। हजारों जल संरक्षण कार्य, लाखों घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता, अमृत मित्रों की सक्रिय भागीदारी, स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पेयजल गुणवत्ता की जांच तथा पोषण वाटिकाओं का निर्माण—ये सभी प्रयास मिलकर जल संरक्षण को व्यापक अभियान का रूप देते हैं।
निश्चित रूप से जल गंगा संवर्धन अभियान सागर जिले में ‘जल से जीवन तक’ बदलाव की एक महत्वपूर्ण कहानी बनकर सामने आया है। यह अभियान आने वाले समय में जल स्रोतों के संरक्षण, भूजल संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा के लिए जनभागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में आधार तैयार कर रहा है।







