
सागर, 21 सितंबर 2026। बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय (बीएमसी) के नेत्र रोग विभाग और आई बैंक ने कॉर्निया प्रत्यारोपण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पिछले 15 दिनों में मरणोपरांत तीन लोगों के नेत्रदान से प्राप्त छह कॉर्निया में से चार स्वस्थ कॉर्निया का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। इससे सागर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े चार बुजुर्ग मरीजों की दृष्टि वापस लौटी है।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने जटिल कॉर्निया प्रत्यारोपण सर्जरी की। टीम में डॉ. नीलम, डॉ. मानसी, डॉ. शिवानी, डॉ. अजय और डॉ. श्रेया सहित अन्य चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ शामिल रहा।
चार मरीजों को मिली दृष्टि
इमरान खान (73 वर्ष) को करीब पांच महीने पहले फंगल इंफेक्शन के कारण कॉर्निया पूरी तरह खराब हो गया था और उनकी दृष्टि चली गई थी। कॉर्निया प्रत्यारोपण के बाद अब उनकी आंखों की रोशनी लौट आई है।
सीता बाई (70 वर्ष) की करीब दो वर्ष पहले चोट लगने के कारण आंख की पुतली खराब हो गई थी। वह लगातार दर्द और अंधेपन की समस्या से परेशान थीं। सफल प्रत्यारोपण के बाद उनकी दृष्टि में सुधार हुआ है।
अशोक (70 वर्ष) पिछले करीब पांच वर्षों से कॉर्निया में सफेदी आने के कारण दृष्टिहीनता का सामना कर रहे थे। बीएमसी में जांच के बाद उनका कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया, जिसके बाद वे फिर से देख पा रहे हैं।
शिवदयाल (71 वर्ष) का आठ महीने पहले मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद कॉर्निया में सूजन और फफोले पड़ने के कारण उनकी दृष्टि चली गई थी। नया कॉर्निया प्रत्यारोपित किए जाने के बाद उनकी दृष्टि बहाल हुई है।
छह कॉर्निया में से चार का हुआ प्रत्यारोपण
डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि हाल ही में तीन नेत्रदाताओं से मरणोपरांत कुल छह कॉर्निया प्राप्त हुए थे। चिकित्सकीय जांच और निर्धारित मानकों के अनुसार इनमें से चार कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त पाए गए। इनका उपयोग चार जरूरतमंद मरीजों के उपचार में किया गया।
शेष दो कॉर्निया प्रत्यारोपण के मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इनका उपयोग विभाग के पीजी चिकित्सकों द्वारा शोध, प्रशिक्षण और चिकित्सीय अध्ययन में किया जाएगा।
बीएमसी में कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा निःशुल्क
बीएमसी डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने बताया कि अस्पताल में कॉर्निया प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है। जरूरतमंद मरीजों के लिए कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रक्रिया और सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की जाती है।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान एक स्वैच्छिक और पुनीत कार्य है। एक व्यक्ति के मरणोपरांत नेत्रदान से दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौट सकती है। समाज के लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक होकर आगे आना चाहिए।
आई बैंक और स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान
आई बैंक की प्रभारी इंचार्ज डॉ. रोशी जैन और डॉ. अंजलि वीरानी ने पीजी छात्रों, नर्सिंग स्टाफ चेतना शुक्ला एवं रामलखन मीणा तथा पैरामेडिकल स्टाफ के साथ समन्वय कर नेत्रदान प्राप्त करने से लेकर कॉर्निया की जांच, संरक्षण और प्रत्यारोपण तक की प्रक्रिया पूरी कराई।
बीएमसी की इस उपलब्धि से यह भी सामने आया है कि समय पर किए गए नेत्रदान और आधुनिक चिकित्सा सुविधा के माध्यम से कॉर्निया संबंधी गंभीर समस्या से जूझ रहे मरीजों को दृष्टि वापस दिलाने में मदद मिल सकती है।








