खुरई में 51 फीट ऊंचे रावण का दहन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा मेला ग्राउंड

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अविराज सिंह बोले—विजयादशमी राष्ट्र की विजय और सांस्कृतिक चेतना का पर्व, युवा पीढ़ी श्रीराम के आदर्शों को अपनाए

खुरई। विजयादशमी के पावन पर्व पर खुरई में नगर पालिका के पीछे स्थित मेला ग्राउंड में भव्य रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया। युवा नेता अविराज सिंह ने तीर चलाकर 51 फीट ऊंचे रावण के साथ 21-21 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया। पुतलों के दहन के साथ ही रंग-बिरंगी आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठा और पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान अविराज सिंह ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और भगवान हनुमान के स्वरूपों का पूजन-अर्चन कर आरती की। उन्होंने मां महिषासुर मर्दिनी का कंठस्थ पाठ भी सुनाया। आयोजन स्थल पर शाम चार बजे से देवी आराधना के लिए संगीतमय भजनों का कार्यक्रम चलता रहा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

श्रीराम के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अविराज सिंह ने कहा कि विजयादशमी केवल उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और न्याय की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम ने अपने आचरण, त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा से समाज को जो आदर्श दिए, वे आज भी प्रत्येक पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि विजयादशमी का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने अधर्म और अहंकार के प्रतीक रावण का अंत किया था, वहीं मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। ये दोनों प्रसंग संदेश देते हैं कि अन्याय, अत्याचार और अहंकार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।

ज्ञान और शक्ति से बड़ा होता है चरित्र

अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक महानता धन, पद, ज्ञान या शक्ति में नहीं, बल्कि उनके सदुपयोग, चरित्र और व्यवहार में निहित होती है। पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करना और भाई भरत के प्रति प्रेम एवं त्याग का परिचय देना श्रीराम के आदर्श व्यक्तित्व को दर्शाता है। इसके विपरीत, रावण ने अपने ज्ञान और सामर्थ्य का उपयोग अहंकार तथा दुराचरण के लिए किया।

उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी मर्यादा और सिद्धांतों पर अडिग रहना ही व्यक्ति के वास्तविक चरित्र की पहचान है। भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को सत्य, कर्तव्य और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

युवा पीढ़ी अपने जीवन में उतारे श्रीराम के आदर्श

अविराज सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे विजयादशमी के संदेश को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने जीवन में भी अपनाएं। धन, पद और बाहरी शक्ति किसी व्यक्ति को महान नहीं बनाती; उसके संस्कार, अनुशासन, चरित्र और दूसरों के प्रति व्यवहार ही उसकी वास्तविक पहचान होते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय सांस्कृतिक चेतना के ऐसे प्रतीक हैं, जिन्होंने उत्तर से दक्षिण तक जनमानस को एक सूत्र में जोड़ने की प्रेरणा दी। उनके आदर्श राष्ट्र के प्रति समर्पण, सामाजिक सद्भाव और मर्यादित आचरण का संदेश देते हैं। विजयादशमी का उत्सव केवल रावण के पुतले का दहन देखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का संकल्प लेना चाहिए।

जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की रही उपस्थिति

खुरई के मेला ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष नन्हीबाई अहिरवार, जनपद अध्यक्ष जमना प्रसाद अहिरवार, मंडल अध्यक्ष राहुल चौधरी, धनोरा मंडल अध्यक्ष राजपाल सिंह, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष रविंद्र सिंह राजपूत, सीएमओ राजेश मेहतेले, पार्षद देशराज सिंह यादव, खुरई थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह दांगी, नीतिराज पटेल, अजीत सिंह अजमानी, महिला मोर्चा अध्यक्ष मोना सिंघाई, भाजपा महिला मोर्चा जिला महामंत्री रश्मि सोनी, प्रवीण जैन गढ़ौला, सुनील जैन, सोनू चंदेल, सपना विश्वकर्मा, आकाश परिहार, मेहरबान अहिरवार, इंद्र कुमार राय, विनोद राजहंस, कमलेश राय, गोपाल नेमा, विक्रम अहिरवार, राजू चंदेल, आलोक कुशवाहा, सुनील राज, उपेंद्र राजपूत, कल्लू यादव और राम शास्त्री सहित भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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