पराली न जलाने और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की किसानों को दी गई सलाह
केसली। किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विकासखंड केसली के ग्राम केवलारी कलां स्थित एफपीओ परिसर में एक दिवसीय मिट्टी परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में इफको (IFFCO) की चलित वैन प्रयोगशाला के माध्यम से लगभग 75 किसानों के खेतों की मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए, जिनके माध्यम से उन्हें अपने खेतों की मिट्टी की स्थिति और पोषक तत्वों की जानकारी मिली।
शिविर में मिट्टी परीक्षण अधिकारी अमित रघुवंशी ने वैज्ञानिक पद्धति से मिट्टी के नमूनों की जांच की। साथ ही किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों की उपलब्धता और फसलों के लिए आवश्यक उर्वरक प्रबंधन के संबंध में जानकारी दी गई।
पराली न जलाएं किसान, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखें
कृषि विभाग केसली के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी कमल खर्ते ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के महत्व और संतुलित उर्वरक प्रबंधन के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी में कार्बनिक कार्बन की मात्रा प्रभावित हो रही है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए किसानों को फसल अवशेषों यानी पराली को खेतों में जलाने से बचना चाहिए।
उन्होंने किसानों को वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग करके फसल अवशेषों को जैविक खाद में बदलने और खेतों में इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने, फसल अवशेषों का बेहतर उपयोग करने और खेती की लागत कम करने का एक उपयोगी तरीका है।
कृषि अधिकारियों ने किसानों की शंकाओं का किया समाधान
शिविर में इफको के मार्केटिंग अधिकारी रामकुमार पटेल, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अनिल मंडलोई, रवि कुमार मोरे तथा एफपीओ के कार्यालय सहायक कुलदीप मुखरैया उपस्थित रहे।
शिविर में केवलारी कलां सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने भाग लिया। किसानों ने मिट्टी परीक्षण, पोषक तत्वों की उपलब्धता और उर्वरकों के संतुलित उपयोग से संबंधित जानकारी प्राप्त की। शिविर के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।







