गौरझामर और अनंतपुरा में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का जाल, कार्रवाई पर उठे सवाल

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टीके विश्वास, अश्वनी मजूमदार और ललित राजोरिया पर बिना उचित चिकित्सकीय योग्यता इलाज करने के आरोप, कलेक्टर ने दिए कार्रवाई कराने के निर्देश
देवरी/गौरझामर। सागर जिले की देवरी तहसील के गौरझामर एवं अनंतपुरा क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा खुलेआम क्लीनिक संचालित कर मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। गौरझामर में टीके विश्वास एवं डॉ. अश्वनी मजूमदार तथा अनंतपुरा ग्राम में ललित राजोरिया पर बिना उचित चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का इलाज करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
आरोप है कि इन क्लीनिकों में विभिन्न बीमारियों का इलाज हैवी इंजेक्शन, ड्रिप (बॉटल) और दवाइयों के माध्यम से किया जा रहा है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
अधिकारियों को जानकारी, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले की जानकारी देवरी बीएमओ, एसडीएम एवं सागर सीएमएचओ तक पहुंचने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि गौरझामर के एक स्थानीय नेता के कथित राजनीतिक संरक्षण के चलते संबंधित डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अब सवाल यह है कि आखिर किसके दबाव में स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है?
बीएमओ का आदेश भी अब तक अधूरा!
मामले में एक और गंभीर सवाल स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक आदेश को लेकर खड़ा हो रहा है। सागर सीएमएचओ द्वारा देवरी बीएमओ डॉ. पूजा परमार को बीएमओ के अतिरिक्त प्रभार से हटाकर उनकी मूल पदस्थापना शाहगढ़ भेजने का आदेश जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। वहीं महाराजपुर अस्पताल में पदस्थ डॉ. अमित रंजन त्रिपाठी को देवरी बीएमओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
लेकिन आरोप है कि आदेश जारी होने के बाद भी आज दिनांक तक न तो डॉ. पूजा परमार को मूल पदस्थापना पर भेजा गया और न ही डॉ. अमित रंजन त्रिपाठी को बीएमओ का प्रभार सौंपा गया। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के आदेशों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
कलेक्टर ने कार्रवाई का दिया भरोसा
पूरे मामले में सागर कलेक्टर दिलीप कुमार यादव से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि आपके द्वारा पूरे मामले में जानकारी प्राप्त हुई है। निश्चित ही गौरझामर के झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई कराई जाएगी।
अब देखना होगा कि कलेक्टर के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग कब तक हरकत में आता है। क्या कथित अवैध क्लीनिकों की जांच कर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होगी? क्या बीएमओ के प्रभार परिवर्तन संबंधी आदेश का पालन कराया जाएगा? या फिर मरीजों की जान से जुड़े इस गंभीर मामले में कार्रवाई का इंतजार ही जारी रहेगा?

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